हरिद्वार/देहरादून (17 मार्च, 2026): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हरिद्वार प्रवास के दौरान जगद्गुरु आश्रम पहुंचकर ‘श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल’ के अध्यक्ष और प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनका आशीर्वाद लिया और आगामी अर्धकुंभ मेले (2027) के सफल व भव्य आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की। राज्य सरकार ने अभी से इस वैश्विक आयोजन की व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद करने के लिए संतों के साथ संवाद शुरू कर दिया है।
अर्धकुंभ की व्यवस्थाओं पर संतों का मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री धामी और स्वामी राजराजेश्वराश्रम के बीच हुई इस मुलाकात का मुख्य केंद्र आगामी अर्धकुंभ की कार्ययोजना रहा:
- दिव्य और भव्य आयोजन: मुख्यमंत्री ने महाराज जी को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार आगामी अर्धकुंभ को ‘दिव्य, भव्य और सुरक्षित’ बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। इसके लिए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- अखाड़ों की समस्याएं: स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कुंभ क्षेत्र में अखाड़ों, आश्रमों और तीर्थयात्रियों को होने वाली असुविधाओं के निराकरण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने गंगा की स्वच्छता और घाटों के सौंदर्यीकरण पर भी बल दिया।
- अतिक्रमण और ट्रैफिक: बैठक में हरिद्वार की यातायात व्यवस्था और मेले के दौरान भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
सनातन संस्कृति का केंद्र बनेगा उत्तराखंड
भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों का आशीर्वाद सरकार के लिए ऊर्जा का स्रोत है:
- आध्यात्मिक गौरव: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को सनातन संस्कृति के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- समन्वय बैठकें: धामी ने बताया कि मेले के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन और संत समाज के बीच निरंतर समन्वय बना रहे, इसके लिए अधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
- जनसुविधाएं: बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मेले के दौरान स्थानीय निवासियों को कम से कम असुविधा हो और तीर्थयात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
संत समाज का समर्थन: ‘सरकार का प्रयास सराहनीय’
स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री धामी निरंतर संत समाज के संपर्क में रहते हैं, जो राज्य के कल्याण के लिए सुखद है। उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा कि धर्मनगरी हरिद्वार की गरिमा के अनुरूप ही अर्धकुंभ का आयोजन होना चाहिए, जिसमें सरकार और धर्मगुरु मिलकर काम करेंगे।





