गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। दीमा हसाओ जिले में एक निजी सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा जमीन देने पर कोर्ट ने नाराज़गी जताते हुए पूछा – “3,000 बीघा!..क्या यह कोई मज़ाक है?”
जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि इतना बड़ा भू-भाग किसी निजी कंपनी को देना असाधारण है। कोर्ट ने उत्तरी कछार हिल्स जिला स्वायत्त परिषद (NCHDAC) से इस फैसले से जुड़ा पूरा रिकार्ड पेश करने को कहा है।
मामले से जुड़ी दो याचिकाओं की सुनवाई एक साथ की जा रही है। पहली याचिका स्थानीय लोगों ने दायर की है, जिनका आरोप है कि उन्हें उनकी वैध जमीन से बेदखल किया जा रहा है। दूसरी याचिका उस कंपनी की है, जिसे करीब 991 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
इस बीच, अदाणी समूह ने स्पष्ट किया है कि जमीन आवंटन से उसका कोई लेना-देना नहीं है। समूह ने मीडिया रिपोर्ट्स को “निराधार, झूठा और भ्रामक” बताया है।





