Thursday, March 5, 2026

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मिशन 2027: उत्तराखंड में ‘सॉफ्ट’ नहीं, अब ‘आक्रामक हिंदुत्व’ की पिच पर बैटिंग करेंगे सीएम धामी; विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हुआ जीत का ‘भगवा’ रोडमैप

देहरादून: उत्तराखंड में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अभी से बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के अनुसार, सीएम धामी इस बार ‘हिंदुत्व’ के मुद्दे पर पहले से कहीं अधिक आक्रामक रुख अपनाएंगे। सरकार के पिछले कार्यकाल और वर्तमान फैसलों पर नजर डालें तो साफ है कि भाजपा ‘देवभूमि’ की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को ही आगामी चुनाव का मुख्य एजेंडा बनाने जा रही है। समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण विरोधी कड़ा कानून और अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे ‘बुल्डोजर अभियान’ को सरकार की इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री का लक्ष्य विकास कार्यों के साथ-साथ ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ के मुद्दे को घर-घर पहुँचाना है।

हिंदुत्व की पिच के 4 मुख्य स्तंभ

सीएम धामी की आगामी चुनावी रणनीति इन चार प्रमुख बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूमने वाली है:

  • यूसीसी (UCC) का क्रियान्वयन: देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू कर उत्तराखंड को ‘नजीर’ के रूप में पेश करना भाजपा का सबसे बड़ा ट्रंप कार्ड होगा।
  • लैंड जेहाद और अतिक्रमण: प्रदेश के जंगलों और सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक स्थलों के खिलाफ जारी कार्रवाई को और तेज किया जाएगा, जिसे मुख्यमंत्री ‘देवभूमि का मूल स्वरूप बचाओ’ अभियान का नाम दे रहे हैं।
  • धर्मांतरण पर प्रहार: जबरन धर्मांतरण के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून लाकर धामी सरकार ने अपनी छवि एक ‘कठोर हिंदूवादी नेता’ के रूप में स्थापित की है, जिसे चुनावों में भुनाया जाएगा।
  • मंदिरों का पुनरुद्धार: ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत कुमाऊं के प्राचीन मंदिरों का कायाकल्प कर धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को जोड़ना।

क्यों बदला रणनीति का अंदाज?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सीएम धामी का यह आक्रामक अंदाज कई कारणों से महत्वपूर्ण है:

  1. सांस्कृतिक सुरक्षा: मुख्यमंत्री बार-बार अपने भाषणों में ‘जनसांख्यिकीय बदलाव’ (Demographic Change) का जिक्र कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनके कोर वोट बैंक को एकजुट करता है।
  2. युवा और महिला मतदाता: विकास के साथ धार्मिक मूल्यों को जोड़कर सरकार महिलाओं और युवाओं के एक बड़े वर्ग को साधने की कोशिश में है।
  3. विपक्ष को बैकफुट पर लाना: हिंदुत्व के पिच पर आक्रामक होकर सीएम धामी कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर रहे हैं।

संगठन और सरकार में तालमेल

‘मिशन 2027’ की सफलता के लिए भाजपा संगठन और सरकार के बीच गहरा तालमेल बिठाया जा रहा है। हाल ही में हुई बैठकों में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे सरकार द्वारा लिए गए ‘कड़े फैसलों’ को जनता के बीच गर्व के साथ पेश करें। मुख्यमंत्री खुद भी जिलों के दौरों में विकास योजनाओं के साथ-साथ धार्मिक अस्मिता की बात प्रमुखता से कर रहे हैं।

निष्कर्ष: ‘धाकड़ धामी’ की नई पहचान

2027 की जंग के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह विकास की राजनीति के साथ-साथ अपनी विचारधारा पर कोई समझौता नहीं करेंगे। ‘देवभूमि’ की सुरक्षा और परंपराओं का संरक्षण ही उनके चुनावी अभियान की धुरी होगी। अब देखना यह होगा कि हिंदुत्व की इस ‘आक्रामक पिच’ का मुकाबला करने के लिए विपक्ष क्या रणनीति अपनाता है।

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