देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की घोषणा की है। पार्टी ने सत्ता में वापसी के लिए एक विशेष ‘गेम प्लान’ तैयार किया है, जिसके तहत पूरे राज्य को आठ रणनीतिक जोन (Zones) में विभाजित किया गया है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर प्रदेश संगठन ने यह कदम जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और गुटबाजी को खत्म कर सीधे जनता से जुड़ने के उद्देश्य से उठाया है।
क्या है कांग्रेस का ‘8-जोन’ फॉर्मूला?
पार्टी ने भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों को चार-चार जोन में बांटा है।
- जोनल ऑब्जर्वर: प्रत्येक जोन की जिम्मेदारी एक वरिष्ठ नेता (जोनल ऑब्जर्वर) को सौंपी जाएगी, जो सीधे प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट करेगा।
- कमांड सेंटर: हर जोन में एक ‘कमांड सेंटर’ बनाया जाएगा, जो उस क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों के बीच समन्वय स्थापित करेगा।
- स्थानीय मुद्दे: पार्टी का मानना है कि जोन में बंटने से स्थानीय समस्याओं (जैसे पलायन, जंगली जानवरों का आतंक, स्वास्थ्य सेवाएं) को घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल करना आसान होगा।
पार्टी के ‘गेम प्लान’ के प्रमुख बिंदु
- बूथ स्तर पर घेराबंदी: हर जोन में ‘बूथ मैनेजमेंट’ को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पार्टी अब “एक बूथ, दस यूथ” की तर्ज पर काम कर रही है।
- युवा और महिला चेहरों को तरजीह: इस नई रणनीति के तहत प्रत्येक जोन में युवा और महिला कार्यकर्ताओं की विशेष टीमें बनाई जा रही हैं, जो घर-घर जाकर राज्य सरकार की विफलताओं को गिनाएंगी।
- गुटबाजी पर लगाम: जोन में वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय होने से टिकट वितरण के समय होने वाली खींचतान और गुटबाजी को कम करने में मदद मिलेगी।
बीजेपी के ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल का जवाब
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम बीजेपी के मजबूत संगठन ‘पन्ना प्रमुख’ और ‘बूथ सशक्तिकरण’ अभियान का जवाब है। कांग्रेस इस बार चुनाव से काफी पहले ही सांगठनिक स्तर पर खुद को मजबूत कर लेना चाहती है ताकि अंतिम समय में प्रबंधन की कमी न रहे।
इन मुद्दों पर रहेगा फोकस
पार्टी ने अपने आठों जोन के कार्यकर्ताओं के लिए ‘मुद्दा डायरी’ तैयार की है, जिसमें निम्नलिखित विषयों पर सरकार को घेरने की योजना है:
- अंकिता भंडारी हत्याकांड और महिला सुरक्षा।
- भर्ती घोटालों पर युवाओं का आक्रोश।
- अग्निवीर योजना के खिलाफ पूर्व सैनिकों की नाराजगी।
- महंगाई और बेरोजगारी का बढ़ता ग्राफ।
नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि यह विभाजन पार्टी को नई ऊर्जा देगा और कार्यकर्ताओं को जवाबदेह बनाएगा।
“हमने उत्तराखंड को आठ जोन में बांटकर अपनी रणनीति को सूक्ष्म (Micro) स्तर पर केंद्रित किया है। अब हमारा नेता केवल मंच पर नहीं, बल्कि हर गांव और हर गली में मौजूद रहेगा। यह गेम प्लान बीजेपी के ‘डबल इंजन’ के दावों की हवा निकाल देगा।” — वरिष्ठ नेता, उत्तराखंड कांग्रेस
आगे क्या?
अगले सप्ताह से सभी आठ जोनों में क्षेत्रीय बैठकें शुरू होंगी, जिसमें पार्टी के बड़े नेता शामिल होंगे। इन बैठकों में प्रत्येक जोन के लिए एक विशिष्ट ‘चार्जशीट’ (सरकार के खिलाफ आरोप पत्र) तैयार की जाएगी, जिसे आगामी आंदोलनों का आधार बनाया जाएगा।





