नई दिल्ली/बेंगलुरु/पुणे: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग का असर अब भारतीय शहरों की धड़कन पर दिखने लगा है। युद्ध के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह बाधित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप भारत के प्रमुख शहरों में तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) और पीएनजी (PNG) की भारी किल्लत हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि बेंगलुरु में जहाँ सैकड़ों होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं, वहीं पुणे में गैस आधारित श्मशान घाटों को बंद करना पड़ा है।
बेंगलुरु: संकट में ‘सिलिकॉन वैली’ का स्वाद
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत ने खाद्य उद्योग की कमर तोड़ दी है:
- होटल-रेस्टोरेंट पर ताले: शहर के कई छोटे और मध्यम दर्जे के होटलों ने गैस की अनुपलब्धता के कारण अपने शटर गिरा दिए हैं।
- बढ़ती कीमतें: जो सिलेंडर उपलब्ध हैं, उनकी कीमतें पिछले एक हफ्ते में 20% से 30% तक बढ़ गई हैं, जिससे रेस्टोरेंट मालिकों के लिए संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया है।
- लंबी वेटिंग लिस्ट: रेस्टोरेंट एसोसिएशन का कहना है कि कमर्शियल रिफिल के लिए अब 4 से 5 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है, जो सामान्यतः 24 घंटे में मिल जाता था।
पुणे: श्मशान घाटों में अंतिम संस्कार रुका
पुणे से बेहद संवेदनशील और चिंताजनक खबर सामने आई है, जहाँ गैस की कमी ने नागरिक सेवाओं को सीधे प्रभावित किया है:
- गैस आधारित भट्टियां बंद: पुणे नगर निगम के तहत आने वाले कई प्रमुख गैस आधारित श्मशान घाटों को गैस आपूर्ति ठप होने के कारण अस्थाई रूप से बंद कर दिया गया है।
- परिजनों की परेशानी: अंतिम संस्कार के लिए पहुँच रहे लोगों को अब मजबूरन पारंपरिक लकड़ी वाली भट्टियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहाँ लंबी कतारें लग रही हैं।
- प्रशासनिक लाचारी: स्थानीय प्रशासन ने स्वीकार किया है कि गैस सप्लायर कंपनियों ने ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) का हवाला देते हुए आपूर्ति में कटौती की है।
क्यों पैदा हुआ यह संकट?
इस किल्लत के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता है:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): दुनिया का 20% गैस और तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है।
- ईरान पर हमले: ईरान, जो भारत के लिए गैस का एक बड़ा स्रोत रहा है, वहां बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों ने निर्यात को पूरी तरह रोक दिया है।
- वैश्विक कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं, जिसका असर घरेलू वितरण पर पड़ रहा है।





