वॉशिंगटन/दुबई (18 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अब तक का सबसे आक्रामक रूप ले लिया है। सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को खुला रखने की अपनी चेतावनी पर अमल करते हुए अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ भीषण बमबारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक घोषणा की है कि उसने ईरान के तटवर्ती इलाकों में स्थित मजबूत मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अपने जखीरे के सबसे घातक 5,000 पाउंड के ‘बंकर बस्टर’ (Bunker Buster) बमों का इस्तेमाल किया है।
ऑपरेशन हॉर्मुज: जमीन के भीतर छिपे ठिकानों पर प्रहार
अमेरिकी वायुसेना द्वारा किए गए इस हमले का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस मिसाइल क्षमता को पंगु बनाना है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग के लिए खतरा बनी हुई थी:
- शक्तिशाली बमों का उपयोग: 5,000 पाउंड वजनी इन बंकर बस्टर बमों का उपयोग विशेष रूप से उन लक्ष्यों के लिए किया जाता है जो कंक्रीट की मोटी परतों से बने हों या जमीन की अत्यधिक गहराई में स्थित हों।
- मिसाइल बेस पर निशाना: अमेरिकी सेना के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान ने समुद्र के किनारे और पहाड़ियों के नीचे अपने अभेद्य मिसाइल साइलो (Silos) बना रखे थे, जिन्हें इन बमों ने सफलतापूर्वक भेदा है।
- हॉर्मुज को खोलने की चुनौती: अमेरिका लगातार मांग कर रहा था कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से अपनी घेराबंदी हटाए। इस सैन्य कार्रवाई को ईरान के लिए एक सीधे और कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों अहम है ‘बंकर बस्टर’ का इस्तेमाल?
युद्ध के 19वें दिन इस प्रकार के भारी हथियारों का इस्तेमाल संघर्ष के अगले स्तर पर पहुँचने का संकेत है:
- अभेद्य किलों को ढहाने की तकनीक: ईरान के अधिकांश रणनीतिक ठिकाने ‘भूमिगत’ (Underground) हैं। साधारण मिसाइलें इन ठिकानों को नुकसान पहुँचाने में विफल रहती हैं, इसीलिए अमेरिका ने अपने सबसे वजनी बमों का सहारा लिया है।
- सटीक मारक क्षमता: सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि इस हमले से ईरान की उन लंबी दूरी की मिसाइलों को भारी नुकसान पहुँचा है, जिन्हें जहाजों को निशाना बनाने के लिए तैनात किया गया था।
- मनोवैज्ञानिक दबाव: इतने भारी विस्फोटों से न केवल भौतिक क्षति हुई है, बल्कि यह ईरान के सैन्य नेतृत्व पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की भी कोशिश है।
वैश्विक तेल संकट और सुरक्षा की चिंता
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं:
- तेल आपूर्ति पर खतरा: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधि ने वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर दी है।
- ईरान की जवाबी कार्रवाई की आशंका: विशेषज्ञों का मानना है कि अपने मिसाइल ठिकानों पर हुए इस बड़े प्रहार के बाद ईरान ‘आत्मघाती ड्रोन’ या ‘नॉन-स्टेट एक्टर्स’ (जैसे हूती या हिजबुल्लाह) के जरिए जवाबी हमला कर सकता है।





