कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मेट्रो चैनल पर शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आधिकारिक धरना स्थल पर अचानक दर्जनों पैरा शिक्षकों (संविदा शिक्षक) ने धावा बोल दिया। मुख्यमंत्री निर्वाचन आयोग की ‘विशेष गहन समीक्षा’ (SIR) और मतदाता सूची से नाम काटे जाने के खिलाफ धरने पर बैठी थीं, तभी अपनी मांगों को लेकर पहुंचे शिक्षकों ने वहां जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया और कई प्रदर्शनकारी शिक्षकों को जबरन उठाकर पुलिस वैन में डाल दिया।
धरना मंच के सामने अचानक प्रदर्शन: ‘दीदी, हमारा हक कब मिलेगा?’
मुख्यमंत्री जब मंच से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर हमला बोल रही थीं, तभी ‘पार्श्व शिक्षक ऐक्य मंच’ के बैनर तले लगभग 100 पैरा शिक्षक सुरक्षा घेरा तोड़कर मंच के करीब पहुँच गए:
- नारेबाजी: शिक्षकों ने वेतन वृद्धि और स्थायी नौकरी की मांग को लेकर “हमारी मांगें पूरी करो” के नारे लगाए।
- मुख्यमंत्री की नाराजगी: इस अचानक हुए व्यवधान से ममता बनर्जी बेहद नाराज नजर आईं। उन्होंने मंच से ही प्रदर्शनकारियों को फटकार लगाते हुए कहा, “यह आपकी मांगों का मंच नहीं है। यहां हम जनता के वोट के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। अगर आपको राजनीति करनी है, तो कहीं और जाकर करें।”
- विपक्ष पर आरोप: मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों पर भाजपा (BJP) के इशारे पर काम करने और धरने को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
पुलिस की कार्रवाई: प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा गया
सुरक्षा में चूक और हंगामे को देखते हुए कोलकाता पुलिस तत्काल हरकत में आई:
- धक्का-मुक्की: पुलिस और शिक्षकों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की हुई। कई महिला शिक्षक सड़क पर ही बैठ गईं और जाने से इनकार कर दिया।
- हिरासत में लिया: पुलिस ने सख्ती बरतते हुए दर्जनों शिक्षकों को मौके से उठाया और पास में खड़ी पुलिस वैन में भरकर ले गई।
- सुरक्षा बढ़ाई गई: घटना के बाद मेट्रो चैनल और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया गया है।
पैरा शिक्षकों की मुख्य मांगें क्या हैं?
राज्य के सरकारी स्कूलों में वर्षों से कार्यरत इन शिक्षकों का आरोप है कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है:
- न्यूनतम वेतन की मांग: प्राथमिक स्तर पर कार्यरत पैरा शिक्षकों को वर्तमान में मात्र ₹10,000 और उच्च प्राथमिक में ₹13,000 प्रति माह मिलते हैं। वे इसे बढ़ाकर ₹20,000 से ₹25,000 करने की मांग कर रहे हैं।
- स्थायीकरण: शिक्षक पिछले 15 वर्षों से नियमित किए जाने (Permanent Jobs) का इंतजार कर रहे हैं।
- सामाजिक सुरक्षा: उनकी मांग है कि उन्हें भी ईपीएफ (EPF) और पेंशन जैसे लाभ दिए जाएं, जो नियमित शिक्षकों को मिलते हैं।





