कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार, 7 मार्च 2026 को कोलकाता में रेड रोड पर स्थित धरना स्थल से उन्होंने केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। ममता बनर्जी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि दिल्ली की वर्तमान सरकार ‘बैसाखियों’ और दूसरों की ‘दया’ पर टिकी है और यदि बंगाल की जनता पर दबाव बनाने की कोशिश की गई, तो वह सरकार को गिराने में देर नहीं लगाएंगी।
‘बैसाखियों पर टिकी है दिल्ली की सत्ता’
धरने के दूसरे दिन ममता बनर्जी का रुख और भी आक्रामक नजर आया। उन्होंने केंद्र सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए कहा:
- अल्पमत का आरोप: मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्र सरकार के पास अपना पूर्ण बहुमत नहीं है और वह क्षेत्रीय दलों के समर्थन के भरोसे चल रही है।
- सत्ता गिराने की चेतावनी: उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, “दिल्ली की सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे दया पर टिके हैं। अगर उन्होंने बंगाल के लोगों का हक छीनने या उन पर अत्याचार करने की कोशिश की, तो मैं इस सरकार को उखाड़ फेंकने का आह्वान करने से पीछे नहीं हटूंगी।”
- बंगाल का अपमान: ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर बंगाल के फंड रोक रही है और केंद्रीय एजेंसियों के जरिए राज्य के अधिकारियों को डरा रही है।
मतदाता सूची (SIR) को लेकर गहराया विवाद
मुख्यमंत्री के इस धरने का मुख्य कारण निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है:
- नाम काटने का आरोप: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वैध मतदाताओं, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों और गरीबों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।
- बीजेपी की साजिश: उन्होंने इसे भाजपा की ‘चुनावी साजिश’ करार देते हुए कहा कि हार के डर से भाजपा वोटरों को बाहर कर रही है।
- 100 मौतों का दावा: मुख्यमंत्री ने फिर दोहराया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और उसके तनाव के कारण राज्य में अब तक लगभग 100 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके लिए केंद्र और चुनाव आयोग जिम्मेदार हैं।
विपक्ष और बीजेपी का पलटवार
ममता बनर्जी के इन कड़े बयानों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है:
- अमित शाह का जवाब: हरिद्वार में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ममता बनर्जी केवल हार के डर से लोगों को गुमराह कर रही हैं और कानून अपना काम करेगा।
- संवैधानिक संकट: भाजपा नेताओं ने कहा कि एक मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र सरकार गिराने की धमकी देना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।





