Saturday, January 31, 2026

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मध्य पूर्व में युद्ध की आहट: ‘ईरान के आसमान से दूर रहें विमान’; अमेरिका की कड़ी चेतावनी के बाद यूरोपीय यूनियन (EU) ने जारी किया ‘नो-फ्लाई’ अलर्ट

ब्रसेल्स/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट के बीच हवाई यात्रा को लेकर एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है। अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई इस चेतावनी के बाद कि ‘कोई भी विमान उसके एयरस्पेस में घुसने का जोखिम न ले’, यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने अपनी सभी एयरलाइंस के लिए एक आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है। यूरोपीय संघ ने यूरोपीय विमानों को ईरान और उसके आसपास के हवाई क्षेत्र का उपयोग न करने की सलाह दी है। खुफिया इनपुट के अनुसार, ईरान की ओर से होने वाली किसी भी संभावित मिसाइल कार्रवाई या इजरायल के जवाबी हमले की स्थिति में नागरिक विमानों के निशाना बनने का खतरा बढ़ गया है। इस फैसले से यूरोप से भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया जाने वाली सैकड़ों उड़ानों के रूट प्रभावित होने की आशंका है।

अमेरिका की वॉर्निंग और सुरक्षा का संकट

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने उपग्रह तस्वीरों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर स्पष्ट किया है कि ईरान का एयरस्पेस इस समय ‘अत्यधिक जोखिम’ वाला क्षेत्र बन गया है:

  • मिसाइल एक्टिविटी: अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि ईरान ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defense Systems) को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा है, जिससे किसी भी अनजाने विमान पर हमले की संभावना बढ़ गई है।
  • इतिहास की सीख: सुरक्षा एजेंसियां 2020 की उस घटना को याद दिला रही हैं जब ईरान ने गलती से यूक्रेन के एक यात्री विमान को मिसाइल से मार गिराया था। अमेरिका अब ऐसी किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए सख्त रुख अपना रहा है।

यूरोपीय यूनियन की एडवाइजरी के मुख्य बिंदु

यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी एयरलाइंस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

  1. रूट में बदलाव: एयर फ्रांस, लुफ्थांसा और केएलएम जैसी बड़ी एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे ईरान के ऊपर से गुजरने वाले अपने सभी रूट तुरंत बदल दें।
  2. वैकल्पिक रास्ते: अब विमानों को तुर्की या मिस्र के ऊपर से लंबा चक्कर लगाकर जाना होगा, जिससे यात्रा के समय में 1 से 2 घंटे की बढ़ोतरी हो सकती है।
  3. ईंधन की बढ़ती लागत: लंबे रूट के कारण एयरलाइंस पर ईंधन का बोझ बढ़ेगा, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय हवाई किरायों पर पड़ सकता है।

वैश्विक उड़ानों पर प्रभाव: भारत के लिए बढ़ी चुनौती

ईरान का एयरस्पेस यूरोप और एशिया के बीच का एक मुख्य गलियारा है। इसके बंद होने या प्रभावित होने से भारत आने-जाने वाली उड़ानों पर गहरा असर पड़ेगा:

  • दिल्ली-लंदन रूट: भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली एयर इंडिया और अन्य विमानन कंपनियों को अब ईरान के बजाय वैकल्पिक और लंबे रास्तों का चुनाव करना होगा।
  • किराये में उछाल: विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो अंतरराष्ट्रीय टिकटों के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।

 

एक तरफ जहाँ अमेरिका और यूरोपीय देश अपने नागरिकों और विमानों को सुरक्षित रखने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इन चेतावनियों को ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ करार दिया है। हालांकि, जमीनी हालात बताते हैं कि किसी भी छोटी सी चूक से बड़ा हवाई हादसा हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं और एयरलाइंस कंपनियां अपने ‘फ्लाईट प्लान’ को हर घंटे अपडेट कर रही हैं।

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