इंफाल। मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा का मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य के गृह विभाग द्वारा आरटीआई के तहत जारी जानकारी के अनुसार, हिंसा के बाद स्थापित राहत शिविरों और अस्थायी आवासों में अब तक 731 विस्थापित लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद 43 हजार से ज्यादा लोग अब भी अपने घरों से दूर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। सरकार और विभिन्न एजेंसियों द्वारा पुनर्वास के प्रयास किए गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोग अभी तक स्थायी रूप से अपने घरों में नहीं लौट पाए हैं। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक शिविरों में रहने के कारण सामाजिक और मानसिक समस्याएं भी बढ़ रही हैं। बच्चों और महिलाओं पर इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। हाल के महीनों में सामने आई रिपोर्टों में राहत शिविरों में रह रहे बच्चों के मानसिक आघात और असुरक्षा की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है।
गौरतलब है कि मई 2023 में शुरू हुई जातीय हिंसा ने मणिपुर के कई जिलों को प्रभावित किया था। हिंसा के चलते हजारों घर नष्ट हुए और बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। स्थिति में कुछ सुधार के बावजूद राज्य में पुनर्वास और सामाजिक सौहार्द की बहाली अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।





