Tuesday, March 3, 2026

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मंत्री प्रियांक खरगे का RSS पर तीखा प्रहार

कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री प्रियांक खरगे ने संघ पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि आरएसएस अपने 100 साल के इतिहास में पहली बार नियमों का पालन करता नजर आ रहा है। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस लंबे समय से वैचारिक और संगठनात्मक दायरे में बिना किसी नियम-कानून के चलता आया है, लेकिन अब परिस्थितियों के कारण संगठन को भी कानूनी ढांचे में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “यह शायद पहली बार है जब संघ व्यवस्था और नियमों को गंभीरता से ले रहा है।”

खरगे ने आरोप लगाया कि संघ की गतिविधियाँ अक्सर संविधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से अलग दिशा में चलती हैं, लेकिन बदलते राजनीतिक हालात में उसे भी अब पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत महसूस हो रही है।

मंत्री के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की यह आदत हो गई है कि वे हर मुद्दे पर आरएसएस को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस देश की सबसे अनुशासित और राष्ट्रहित में काम करने वाली संस्था है, जिसके योगदान को किसी भी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जा सकता।
भाजपा ने प्रियांक खरगे के बयान को “राजनीतिक हताशा” बताया।

इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रही हैं। प्रियांक खरगे के बयान को कांग्रेस की ओर से केंद्र सरकार और संघ के खिलाफ चल रही व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मंत्री ने सिर्फ यह इंगित किया है कि किसी भी संगठन को लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के तहत काम करना चाहिए। उनका मानना है कि देश में सभी संस्थाओं पर समान नियम और पारदर्शिता लागू होनी चाहिए, फिर चाहे वह राजनीतिक दल हों या सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन।

प्रियांक खरगे का “100 साल में पहली बार नियमों का पालन” वाला कथन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थक और विरोधी दोनों ही इस टिप्पणी पर अपनी-अपनी व्याख्याएं दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कर्नाटक में सियासी चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।

कुल मिलाकर, प्रियांक खरगे के इस बयान ने कर्नाटक की राजनीतिक फिजा में नई गर्माहट ला दी है, और इसका असर आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में देखने को मिल सकता है।

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