नई दिल्ली/ब्यूरो: भारतीय रेल मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए रेल अधिकारियों के लिए दशकों से चले आ रहे ‘काले कोट’ के अनिवार्य ड्रेस कोड को समाप्त कर दिया है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा को अब आधुनिक और भारतीय परिवेश के अनुकूल यूनिफॉर्म से बदला जाएगा। रेल मंत्रालय का मानना है कि यह कदम न केवल औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का प्रतीक है, बल्कि अधिकारियों को काम के दौरान अधिक सहजता भी प्रदान करेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
रेलवे में काला कोट पहनने की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। सरकार के इस फैसले के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए जा रहे हैं:
- औपनिवेशिक विरासत का अंत: केंद्र सरकार ‘पंच प्राण’ के तहत गुलामी के सभी प्रतीकों को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। काला कोट उसी कालखंड की निशानी माना जाता था।
- बदलते मौसम की जरूरत: भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में भारी काला कोट पहनकर फील्ड ड्यूटी करना अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण होता था।
- नई पहचान: रेलवे को एक आधुनिक और भविष्योन्मुखी (Future-ready) संस्था के रूप में पेश करने के लिए अधिकारियों के लुक में बदलाव आवश्यक समझा गया।
कैसा होगा नया ड्रेस कोड?
मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब रेल अधिकारियों की यूनिफॉर्म अधिक पेशेवर और आरामदायक होगी:
- रंग और डिजाइन: नए ड्रेस कोड में काले रंग की जगह अब गहरे नीले (नेवी ब्लू) या ग्रे रंग के सूट/कोट को प्राथमिकता दी जा सकती है।
- गर्मी के लिए विशेष प्रावधान: गर्मियों के दौरान कोट की अनिवार्यता को खत्म कर केवल औपचारिक शर्ट और ट्राउजर के विकल्प को बढ़ावा दिया जाएगा।
- आधुनिक लोगो: नई यूनिफॉर्म पर भारतीय रेलवे का नया और चमकदार लोगो होगा, जो गर्व और आधुनिकता का एहसास कराएगा।
किन पर लागू होगा यह नियम?
यह नया नियम मुख्य रूप से उन वरिष्ठ अधिकारियों और फ्रंटलाइन स्टाफ पर लागू होगा जो यात्रियों के सीधे संपर्क में आते हैं या प्रशासनिक भूमिकाओं में हैं। इसमें स्टेशन मास्टर, टीटीई (कुछ श्रेणियों में) और अन्य तकनीकी व गैर-तकनीकी विभागों के अधिकारी शामिल हैं। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्दी में यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि सभी कर्मचारियों को इसे अपनाने का समय मिल सके।
कर्मचारी यूनियनों ने किया स्वागत
रेलवे कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। यूनियनों का कहना है कि काला कोट पहनना शारीरिक रूप से थकाने वाला था और इस बदलाव की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब नई यूनिफॉर्म से अधिकारियों के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और वे अधिक ऊर्जा के साथ काम कर सकेंगे।
निष्कर्ष: बदलता भारतीय रेलवे
वंदे भारत, अमृत भारत और स्टेशनों के कायाकल्प के बाद, अब अधिकारियों के पहनावे में यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रेलवे केवल तकनीक में ही नहीं, बल्कि अपनी कार्य संस्कृति और पहचान में भी पूर्णतः ‘भारतीय’ होने की ओर अग्रसर है।





