नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और विनाशकारी गोलाबारी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का रुख स्पष्ट कर दिया है। एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान वैश्विक मंच से संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “भारत सदैव विश्व में शांति का पक्षधर रहा है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का युग युद्ध का नहीं है और किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया दो गुटों में बंटती नजर आ रही है, और भारत एक बार फिर ‘विश्व मित्र’ के रूप में शांति बहाली की वकालत कर रहा है।
पीएम मोदी का संदेश: “मानवता को बचाने के लिए एकजुट हो दुनिया”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में युद्ध की विभीषिका और निर्दोष नागरिकों की जान जाने पर गहरी संवेदना व्यक्त की:
- संवाद ही एकमात्र रास्ता: पीएम ने स्पष्ट किया कि हिंसा से केवल विनाश होता है, समाधान नहीं। उन्होंने सभी संबंधित देशों से युद्ध विराम (Ceasefire) और टेबल पर बैठकर बात करने का आग्रह किया।
- भारत की तटस्थता और सक्रियता: भारत ने न तो इजरायल का साथ देकर युद्ध को बढ़ावा दिया और न ही ईरान की आक्रामकता का समर्थन किया, बल्कि ‘शांति की राह’ को प्राथमिकता दी है।
- ग्लोबल साउथ की चिंता: पीएम ने आगाह किया कि मिडिल ईस्ट में अस्थिरता का सबसे बुरा असर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
कूटनीतिक सक्रियता: दुनिया देख रही है भारत की ओर
प्रधानमंत्री के इस बयान के पीछे भारत की सक्रिय विदेश नीति के कई आयाम हैं:
- नेताओं से संपर्क: पीएम मोदी लगातार इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और अन्य खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के संपर्क में हैं, ताकि तनाव को कम किया जा सके।
- मानवीय सहायता: भारत ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयां और राहत सामग्री भेजकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है कि वह केवल बोलता नहीं, बल्कि मानवता के लिए काम भी करता है।
- ऊर्जा और प्रवासियों की सुरक्षा: प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत की प्राथमिकता वहां फंसे अपने नागरिकों की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है।
जी-20 और बुद्ध की धरती का संदेश
प्रधानमंत्री ने भारत की ऐतिहासिक विरासत का हवाला देते हुए शांति का आह्वान किया:
- उन्होंने कहा कि भारत वह भूमि है जिसने दुनिया को ‘युद्ध’ नहीं बल्कि ‘बुद्ध’ दिए हैं।
- जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ का जो मंत्र दिया था, वह आज के संकटपूर्ण समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।





