भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से उसके सुधार पर समयबद्ध बातचीत के लिए प्रतिबद्ध होने का आह्वान किया है। भारत ने स्पष्ट तौर पर प्रमुख देशों और समूहों द्वारा परिषद के तंत्र में हेरफेर को बहुपक्षीय भावना के लिए ‘हानिकारक’ बताया है। बता दें, चीन नहीं चाहता कि सुरक्षा परिषद में सुधार हों और भारत को इसका स्थायी सदस्य बनने का मौका मिले। संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत आर. रवींद्र ने सुरक्षा परिषद की खुली बहस में कहा, विश्व संस्था के बहुपक्षीय प्रणाली के नाकाम रहने का प्राथमिक कारण इसका अभी भी 1945 के पुराने नजरिये में फंसा होना है। यह सुरक्षा परिषद की संरचना में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। इसलिए, सुधारित बहुपक्षवाद पर भारत की स्थिति का मूल, सुरक्षा परिषद में सुधार के आह्वान में निहित है, जो समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है। सुधारों पर समयबद्ध वार्ता के लिए पुनः प्रतिबद्धता का आह्वान करते हुए, रवींद्र ने कहा, बड़े देशों या समूहों द्वारा अपने संकीर्ण हित में बातचीत प्रक्रियाओं और तंत्रों में तोड़फोड़ की जा रही है। यह बहुपक्षीय भावना के लिए हानिकारक है और जहां भी जरूरी हो, इसका विरोध होना चाहिए। भारतीय दूत ने कहा, हम एक और विश्व युद्ध रोक सकते हैं, लेकिन यह आतंकवाद, महामारी, जलवायु परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकियों से पैदा खतरों व साइबर हमलों जैसी जटिल वैश्विक चुनौतियों का जवाब देने में संयुक्त राष्ट्र की असमर्थता को नहीं छिपाता है। उन्होंने जी-20 सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी के बयान का जिक्र भी किया जिसमें उन्होंने कहा था कि जब संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई थी, उस समय की दुनिया आज से बिल्कुल अलग थी। कर्नल भल्ला ने कहा, भारत की विकासात्मक परियोजनाओं का संचयी मूल्य अब 40 अरब डॉलर से अधिक है। उन्होंने 2023 की पीबीसी रिपोर्ट को आयोग द्वारा की गई सकारात्मक पहल का प्रमाण बताया। सैन्य सलाहकार कर्नल भल्ला ने कहा, हमारा मानना है कि इन लाभों को और अधिक चर्चा के साथ समेकित करने की आवश्यकता है। उन्होंने शांति निर्माण में भारत की निरंतर प्रतिबद्धता का आश्वासन भी दिया।





