पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने कहा है कि आंतरिक सुरक्षा सभी का मसला है। यह हमारा कर्तव्य है कि जिनसे हम संपर्क में आते हैं, उनके साथ इस जिम्मेदारी को साझा करें। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अगर हम किसी ऐसी स्थिति में हैं जो आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी है, तो हमारा अहंकार इसमें बाधा न बने, बल्कि हमें इतना लचीला होना चाहिए कि हम ऐसे समाधान निकाल सकें जो पूरे देश के लिए मददगार साबित हों। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह बातें शुक्रवार को चाणक्य रक्षा संवाद में कही। भारत-चीन सीमा पर गश्ती को लेकर हुए समझौते की सराहना करते हुए सिंह ने कहा कि इस फैसले के तौर-तरीके जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों को तय करने चाहिए। उन्होंने इसे सकारात्मक कदम बताते हुए भारतीय राजनयिकों की तारीफ की, जिन्होंने काफी वक्त से लंबित इस समझौते को पूरा करने में योगदान दिया। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि समझौता सीमा पर सेना की मौजूदगी कम करने और गश्त के नियम बनाने को लेकर है। इसकी बारीकियों को अमलीजामा पहनाने में वक्त लगेगा।जनरल सिंह ने कहा कि भारत-चीन समझौते से एक सकारात्मक माहौल बना है। इससे दोनों देशों के नेताओं को ऐसे फैसले लेने में मदद मिलेगी जो दोनों के लिए फायदेमंद हों। उन्होंने बताया कि कई बैठकें होंगी और उसके बाद ही हम असल नतीजे देख पाएंगे। हालांकि, उन्हें विश्वास है कि इस सकारात्मक माहौल में दोनों पक्ष सार्थक बातचीत कर सकेंगे और आपसी फायदे वाले नतीजे पर पहुंच सकेंगे।
सैन्य गतिरोध पर बनी भारत-चीन में बात
पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 10 महीने से चल रहे सैन्य गतिरोध के बीच भारत और चीन ने विवादित पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारों से अपने सैनिकों को हटाने के लिए एक समझौता किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में इस समझौते का एलान करते हुए कहा कि चीनी सैनिक फिंगर 8 के पूर्व में वापस चले जाएंगे। वहीं, भारतीय पक्ष फिंगर 3 के पास अपने धन सिंह थापा पोस्ट पर लौट जाएगा।





