नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हस्ताक्षरित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के लिए वैश्विक व्यापार के नए द्वार खोल दिए हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘मेगा डील’ का सबसे बड़ा लाभ देश के उन छोटे उद्यमियों को मिलेगा जो अब तक भारी आयात शुल्क और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण यूरोपीय बाजार से दूर थे। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यह समझौता न केवल निर्यात को दोगुना करेगा, बल्कि भारत के छह प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और आधा दर्जन से अधिक राज्यों की अर्थव्यवस्था का कायाकल्प करने की क्षमता रखता है।
MSME सेक्टर के लिए ‘संजीवनी’ बनेगा समझौता
भारत के कुल निर्यात में MSME का योगदान लगभग 45% है।
- शुल्क मुक्त प्रवेश: समझौते के तहत, यूरोपीय संघ के 27 देशों में भारतीय लघु उद्योगों के उत्पादों को शून्य सीमा शुल्क (Zero Duty) पर प्रवेश मिलेगा, जिससे उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी।
- तकनीकी सहयोग: भारतीय छोटे उद्योगों को यूरोपीय तकनीक और मानकों को अपनाने के लिए विशेष सहयोग मिलेगा, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता वैश्विक स्तर की होगी।
इन 6 सेक्टरों की होगी ‘चांदी’
समझौते के बाद विशेषज्ञों ने निम्नलिखित क्षेत्रों में जबरदस्त उछाल की भविष्यवाणी की है:
- टेक्सटाइल और गारमेंट्स (Textile): भारत के सूती और रेशमी कपड़ों के लिए यूरोप एक बहुत बड़ा बाजार है। बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले अब भारत को ड्यूटी-फ्री लाभ मिलेगा।
- चमड़ा उद्योग (Leather): जूते, जैकेट और बैग जैसे चमड़े के उत्पादों के निर्यात में 20-30% की वृद्धि की उम्मीद है।
- रत्न एवं आभूषण (Gems & Jewellery): हॉलमार्क और डिजाइनिंग के मामले में भारतीय आभूषणों की मांग पेरिस और बर्लिन के बाजारों में बढ़ेगी।
- हस्तशिल्प (Handicrafts): लकड़ी, धातु और मिट्टी के पारंपरिक शिल्प उत्पादों के लिए ईयू एक प्रीमियम मार्केट साबित होगा।
- प्रसंस्कृत खाद्य (Processed Food): भारतीय मसालों, चाय और ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए कड़े मानकों (Phytosanitary measures) में ढील मिलने से इस क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
- इंजीनियरिंग गुड्स: ऑटो पार्ट्स और मशीनरी पुर्जों के लिए भारतीय MSME को बड़ी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का हिस्सा बनने का मौका मिलेगा।
इन 6+ राज्यों को मिलेगा ‘सुपर बूस्ट’
इस डील का सबसे अधिक सकारात्मक असर उन राज्यों पर पड़ेगा जो निर्यात के केंद्र (Export Hubs) हैं:
- उत्तर प्रदेश: भदोही के कालीन, आगरा के चमड़े और मुरादाबाद के पीतल उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा।
- तमिलनाडु: तिरुपुर का टेक्सटाइल हब और चेन्नई का लेदर क्लस्टर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनेंगे।
- गुजरात: हीरा कटिंग-पॉलिशिंग और केमिकल सेक्टर में भारी विदेशी निवेश आने की उम्मीद है।
- महाराष्ट्र: आईटी सर्विसेज, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर में निर्यात के नए रिकॉर्ड बनेंगे।
- कर्नाटक: बेंगलुरु के स्टार्टअप्स और एरोस्पेस MSMEs के लिए यूरोपीय फंडिंग के रास्ते खुलेंगे।
- पश्चिम बंगाल और पंजाब: जूट उत्पादों और जालंधर-लुधियाना के खेल व होजरी सामान के लिए नया बाजार मिलेगा।
रोजगार और निवेश के नए कीर्तिमान
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता भारत को ‘ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
- निवेश (FDI): यूरोपीय कंपनियां अब ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के तहत भारत में अपनी उत्पादन इकाइयां लगाएंगी।
- कुशल मैनपावर: बढ़ते निर्यात के कारण अगले 5 वर्षों में इन छह राज्यों में लगभग 30 लाख से अधिक नए रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
चुनौतियां और तैयारी
हालांकि अवसर बड़े हैं, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूरोपीय बाजार के कड़े ‘पर्यावरण और श्रम मानकों’ (ESG Standards) को पूरा करना भारतीय MSMEs के लिए एक चुनौती होगी। सरकार ने इसके लिए पहले ही ‘निर्यात मित्र’ जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है।
“यह समझौता हमारे छोटे उद्यमियों के लिए एक गेम-चेंजर है। अब ‘लोकल’ उत्पाद सही मायने में ‘ग्लोबल’ बनेंगे। हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारे MSMEs को यूरोपीय मानकों के अनुकूल बनाया जाए ताकि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठा सकें।” — पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री
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