Wednesday, February 4, 2026

Top 5 This Week

Related Posts

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ हटने की राह आसान; ‘धारा 232’ से राहत की तैयारी में दोनों देश

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच चल रही उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता से भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देश एक ऐसे ऐतिहासिक समझौते के करीब पहुंच गए हैं, जिसके तहत अमेरिका भारतीय स्टील (इस्पात), एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर लगे अतिरिक्त निर्यात शुल्क (टैरिफ) को हटा सकता है। अमेरिका ने पूर्व में ‘धारा 232’ (Section 232) के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन उत्पादों पर भारी टैक्स लगाया था। इस समझौते के बाद भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में फिर से प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलने की संभावना है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में अरबों डॉलर की वृद्धि हो सकती है।

क्या है ‘धारा 232’ और यह भारत के लिए क्यों थी बाधा?

अमेरिका के व्यापार विस्तार अधिनियम, 1962 की धारा 232 राष्ट्रपति को यह अधिकार देती है कि वे उन आयातों पर प्रतिबंध या टैरिफ लगा सकें जो ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के लिए खतरा हो सकते हैं:

  • 2018 का विवाद: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने भारतीय स्टील पर 25% और एल्युमीनियम पर 10% टैरिफ लगाया था।
  • भारत का पलटवार: जवाब में भारत ने भी अमेरिका से आने वाले सेब, अखरोट और बादाम जैसे 28 उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगा दिया था।
  • सुलह की राह: अब प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी प्रशासन के बीच बढ़ते भरोसे के बाद इन व्यापारिक बाधाओं को हमेशा के लिए खत्म करने पर सहमति बन रही है।

भारतीय ऑटो सेक्टर और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बूस्ट

समझौते की शर्तों के तहत ऑटो पार्ट्स को टैरिफ के दायरे से बाहर रखने की संभावना सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है:

  1. सप्लाई चेन में मजबूती: भारतीय ऑटो पार्ट्स कंपनियां अमेरिका के बड़े कार निर्माताओं (जैसे फोर्ड और जीएम) के लिए प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। टैक्स हटने से भारत की लागत कम होगी और निर्यात बढ़ेगा।
  2. स्टील और एल्युमीनियम उद्योग: टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू और हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार फिर से पूरी तरह खुल जाएगा, जिससे उनके मुनाफे में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
  3. रोजगार के अवसर: निर्यात बढ़ने से घरेलू विनिर्माण इकाइयों में हजारों नए तकनीकी और कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होगी।

बाजार विशेषज्ञों का आकलन

आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये उत्पाद टैरिफ के दायरे से बाहर होते हैं, तो भारत-अमेरिका व्यापार जो फिलहाल लगभग $190 बिलियन के करीब है, अगले दो वर्षों में $250 बिलियन के आंकड़े को छू सकता है।

अगले कदम: औपचारिक घोषणा का इंतजार

दोनों देशों के वाणिज्य मंत्रालयों के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है। अब केवल औपचारिक घोषणा और कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होना बाकी है।

  • भारत की रियायतें: बदले में भारत भी कुछ अमेरिकी उत्पादों (जैसे उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक्स और विशिष्ट कृषि उत्पादों) पर लगे अपने आयात शुल्कों को कम करने पर विचार कर रहा है।

“धारा 232 के तहत टैरिफ में छूट मिलना भारतीय इस्पात और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत होगी। यह दर्शाता है कि अमेरिका अब भारत को न केवल एक बाजार, बल्कि एक विश्वसनीय और रणनीतिक सहयोगी के रूप में देख रहा है।” — वरिष्ठ व्यापार विश्लेषक

Popular Articles