न्यूयॉर्क। दुनिया की सबसे बड़ी निवेश प्रबंधन कंपनियों में से एक ब्लैकरॉक (BlackRock) इन दिनों एक बड़े वित्तीय घोटाले को लेकर सुर्खियों में है। कंपनी के साझेदार उपक्रम से जुड़े एक भारतीय मूल के सीईओ, बंकिम ब्रह्मभट्ट, पर करोड़ों डॉलर के वित्तीय घपले का आरोप लगा है। अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इस मामले में प्राथमिक जांच शुरू कर दी है, जबकि कंपनी ने संबंधित अनुबंध रद्द कर अपने निवेशकों को सतर्क किया है।
सूत्रों के अनुसार, बंकिम ब्रह्मभट्ट की अगुवाई वाली कंपनी ने ब्लैकरॉक के साथ निवेश प्रबंधन और एसेट डीलिंग के क्षेत्र में साझेदारी की थी। आरोप है कि ब्रह्मभट्ट और उनकी टीम ने फर्जी दस्तावेज़ और गलत वित्तीय आकलन के जरिए निवेशकों से करोड़ों डॉलर की राशि हड़प ली। यह रकम कथित तौर पर ऑफशोर खातों और संबद्ध कंपनियों के जरिए घुमाई गई।
ब्लैकरॉक ने एक बयान में कहा है कि उसे “धोखाधड़ी और ग़लत आचरण की विश्वसनीय जानकारी” मिली है, जिसके बाद कंपनी ने तत्काल कदम उठाते हुए ब्रह्मभट्ट से जुड़े सभी अनुबंध और संचालन समझौते समाप्त कर दिए हैं। साथ ही, कंपनी ने अमेरिकी प्रतिभूति विनियामक प्राधिकरण (SEC) और न्याय विभाग को जांच सौंप दी है।
कौन हैं बंकिम ब्रह्मभट्ट?
बंकिम ब्रह्मभट्ट का नाम वित्तीय जगत में लंबे समय से जाना जाता रहा है। गुजरात से ताल्लुक रखने वाले ब्रह्मभट्ट ने शुरुआती पढ़ाई भारत में की और बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डिग्री हासिल की। उन्होंने लंदन में फोरसाइट ग्रुप इंटरनेशनल नाम से एक निवेश फर्म की स्थापना की थी, जो बाद में ब्लैकरॉक से जुड़ी परियोजनाओं में साझेदार बनी।
ब्रह्मभट्ट अपने आक्रामक निवेश मॉडल और उच्च जोखिम वाले प्रोजेक्ट्स में निवेश के लिए जाने जाते थे। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कई देशों में रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्रिप्टो फंडिंग प्रोजेक्ट्स में निवेश किया।
जांच के दायरे में ऑफशोर लेनदेन
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मभट्ट की फर्म ने जिन निवेश पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया, उनमें कई अनधिकृत फंड ट्रांसफर और संदिग्ध विदेशी खातों का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ रकम मध्यपूर्व और सिंगापुर के माध्यम से ट्रांसफर की गई।
ब्लैकरॉक का नुकसान और निवेशकों में चिंता
घोटाले के सामने आने के बाद ब्लैकरॉक ने कहा है कि कंपनी ने निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए हैं। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से कंपनी की साख पर असर पड़ सकता है। ब्लैकरॉक के प्रवक्ता ने कहा, “हम पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर काम करते हैं, और किसी भी धोखाधड़ी के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हैं।”
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारतीय मूल के कॉर्पोरेट नेताओं की साख को भी प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ब्रह्मभट्ट लंबे समय तक भारतीय निवेश प्रवासी समुदाय में एक सम्मानित चेहरा रहे हैं।
फिलहाल जांच एजेंसियां उनके वित्तीय लेनदेन और व्यक्तिगत संपत्तियों की फॉरेंसिक ऑडिट में जुटी हैं। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो ब्रह्मभट्ट को भारी आर्थिक दंड और लंबी जेल सजा का सामना करना पड़ सकता है।





