ह्यूस्टन। मानव इतिहास में अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग का सूत्रपात करते हुए नासा (NASA) के आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। चंद्रमा की ओर तीव्र गति से बढ़ रहे ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान और पृथ्वी की निचली कक्षा में चक्कर लगा रहे ‘इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन’ (ISS) के बीच पहली बार सीधे तौर पर ‘शिप-टू-शिप’ वीडियो कॉल संपन्न हुआ। अंतरिक्ष की गहराइयों में दो अलग-अलग यानों के बीच हुआ यह संवाद भविष्य के अंतर-ग्रहीय मिशनों के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
दो अंतरिक्ष यानों के बीच पहला सीधा संवाद
अब तक अंतरिक्ष यात्री मुख्य रूप से पृथ्वी पर स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर से ही संपर्क साधते थे, लेकिन यह पहली बार है जब गहरे अंतरिक्ष में जा रहे किसी यान ने दूसरे अंतरिक्ष स्टेशन से सीधा संपर्क स्थापित किया है।
- संचार की तकनीक: यह कॉल अत्याधुनिक लेजर संचार प्रणाली के माध्यम से संभव हो पाई, जो पारंपरिक रेडियो तरंगों की तुलना में डेटा को कहीं अधिक तेजी और स्पष्टता से भेजने में सक्षम है।
- ऐतिहासिक क्षण: ओरियन यान में सवार चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने आईएसएस पर मौजूद क्रू मेंबर्स के साथ कुछ मिनटों तक बातचीत की और एक-दूसरे का उत्साहवर्धन किया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर बसने वाली बस्तियों के बीच संपर्क का मुख्य जरिया बनेगी।
चंद्रमा के ‘सुदूर हिस्से’ (Far Side) की पहली मानव यात्रा
आर्टेमिस-2 मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि यह दशकों बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा के करीब ले जा रहा है।
- अज्ञात का अन्वेषण: इस मिशन के जरिए पहली बार इंसान चंद्रमा के उस हिस्से (Far Side) के ऊपर से उड़ान भर रहा है, जो कभी पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
- मंगल मिशन की नींव: नासा का लक्ष्य इस मिशन के माध्यम से यह जांचना है कि क्या ‘ओरियन’ यान के लाइफ सपोर्ट सिस्टम गहरे अंतरिक्ष में इंसानों को सुरक्षित रख सकते हैं। यह अनुभव भविष्य के ‘मार्स मिशन’ (Mars Mission) के लिए ब्लूप्रिंट का काम करेगा।
नासा प्रमुख की प्रतिक्रिया: “भविष्य अब करीब है”
इस सफल कॉल के बाद नासा मुख्यालय में उत्साह का माहौल है। अधिकारियों ने इसे अंतरिक्ष कूटनीति और तकनीक की बड़ी जीत बताया है।
“आज हमने साबित कर दिया है कि अंतरिक्ष में दूरी अब संचार में बाधा नहीं बनेगी। ‘शिप-टू-शिप’ कॉल केवल एक तकनीकी परीक्षण नहीं है, बल्कि यह उस भविष्य की झलक है जहां सौर मंडल के विभिन्न हिस्सों में मौजूद इंसान एक-दूसरे से जुड़े रहेंगे।” — बिल नेल्सन, नासा प्रशासक





