मुंबई: देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया है कि बीएमसी का नेतृत्व और नियंत्रण हमेशा मराठी लोगों के हाथ में ही रहेगा। विपक्ष, विशेषकर उद्धव ठाकरे गुट द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों कि ‘भाजपा मुंबई का महत्व कम कर रही है’ या ‘मुंबई को गुजरात के हाथ में सौंपना चाहती है’, पर कड़ा प्रहार करते हुए फडणवीस ने इसे महज एक ‘चुनावी प्रोपेगेंडा’ करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई की अस्मिता और मराठी संस्कृति के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विपक्ष के ‘क्षेत्रीय कार्ड’ पर फडणवीस का पलटवार
पिछले कुछ समय से उद्धव सेना और कांग्रेस लगातार यह आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा मुंबई के व्यापार और गौरव को राज्य से बाहर ले जा रही है। फडणवीस ने इन पर विराम लगाते हुए कहा:
- भ्रम फैलाने की राजनीति: फडणवीस ने कहा कि विपक्ष के पास विकास का कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए वे ‘मराठी बनाम गैर-मराठी’ का डर दिखाकर वोट बटोरना चाहते हैं।
- अधिकारों की रक्षा: उन्होंने भरोसा दिलाया कि बीएमसी की सत्ता में चाहे कोई भी गठबंधन आए, उसका मुख्य चेहरा और निर्णय लेने वाली शक्ति ‘मराठी चेहरा’ ही होगी।
बीएमसी चुनाव के मुख्य मुद्दे और रणनीति
देवेंद्र फडणवीस के इस बयान के पीछे कई रणनीतिक कारण माने जा रहे हैं:
- मराठी वोट बैंक पर पकड़: मुंबई में जीत के लिए मराठी वोट बैंक निर्णायक होता है। भाजपा इस बयान के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह शिवसेना (उद्धव गुट) की तरह ही मराठी हितों की रक्षक है।
- विकास का एजेंडा: फडणवीस ने कहा कि बीएमसी में पिछले 25-30 वर्षों से जिस ‘भ्रष्टाचार’ का बोलबाला रहा है, उसे खत्म करना ही उनका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने ‘विकास’ को ‘क्षेत्रवाद’ से ऊपर रखने की बात कही।
- हिंदुत्व और अस्मिता: भाजपा अब विकास के साथ-साथ मराठी अस्मिता और हिंदुत्व के साझा एजेंडे पर चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: उद्धव गुट ने साधा निशाना
फडणवीस के इस बयान पर शिवसेना (UBT) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संजय राउत ने तंज कसते हुए कहा कि “जब मुंबई के बड़े प्रोजेक्ट गुजरात जा रहे थे, तब मराठी अस्मिता की याद क्यों नहीं आई?” विपक्ष का तर्क है कि भाजपा केवल चुनाव जीतने के लिए मराठी प्रेम का ढोंग कर रही है।
निष्कर्ष: मुंबई की सत्ता के लिए कांटे की टक्कर
बीएमसी का चुनाव न केवल आर्थिक रूप से बल्कि राजनीतिक रूप से भी प्रतिष्ठा की लड़ाई है। फडणवीस का यह बयान साफ करता है कि भाजपा अब सीधे तौर पर उन मुद्दों पर खेल रही है जो कभी केवल शिवसेना के एकाधिकार माने जाते थे। आने वाले दिनों में मुंबई की सड़कों पर ‘मराठी मानुस’ को रिझाने के लिए राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग और भी तेज होने की उम्मीद है।





