मुंबई: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के आगामी चुनाव और सदन में सत्ता की चाबी को लेकर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपनी आक्रामक रणनीति का खुलासा कर दिया है। उद्धव ठाकरे की टीम ने दावा किया है कि बीएमसी में बहुमत का जादुई आंकड़ा पाने के लिए उनके पास केवल 6 सीटों की कमी है और जल्द ही वे इसे पूरा कर लेंगे। उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए संकेत दिए कि प्रतिद्वंद्वी खेमे के कई पार्षद और बड़े नेता उनके संपर्क में हैं। ‘इंतजार करिए’ के इस रहस्यमयी संदेश ने शिंदे सेना और भाजपा गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्धव ठाकरे बीएमसी को अपने कब्जे में बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो यह उनकी राजनीति के लिए एक संजीवनी की तरह होगा।
उद्धव गुट के दावे और रणनीति के मुख्य बिंदु
शिवसेना (UBT) के रणनीतिकारों ने स्पष्ट किया है कि वे हार मानने को तैयार नहीं हैं:
- संपर्क में बागी: पार्टी सूत्रों का कहना है कि एकनाथ शिंदे गुट के कई पार्षद अपनी उपेक्षा से नाराज हैं और वे वापस ‘मातोश्री’ लौटने की योजना बना रहे हैं।
- रणनीतिक घेराबंदी: उद्धव गुट ने उन 6 सीटों को भरने के लिए निर्दलीय और छोटे दलों के साथ भी परदे के पीछे बातचीत शुरू कर दी है।
- मराठी मानुस का भरोसा: पार्टी का दावा है कि मुंबई का आम मतदाता अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ है, जो फ्लोर टेस्ट या चुनाव के दौरान निर्णायक साबित होगा।
सत्ता के समीकरण और बहुमत का गणित
बीएमसी में कुल 227 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 114 का आंकड़ा जरूरी है:
- वर्तमान स्थिति: उद्धव गुट का मानना है कि उनके पास समर्पित पार्षदों और सहयोगियों का एक मजबूत आधार है, जिसमें उन्हें केवल एक छोटी संख्या जोड़ने की जरूरत है।
- विरोधी खेमे की चुनौती: शिंदे गुट और भाजपा ने भी बीएमसी पर कब्जा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। ऐसे में उद्धव टीम का ‘6 सीटों’ वाला दावा एक मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) के रूप में भी देखा जा रहा है।
- कानूनी पेच: सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोग्यता के मामलों का असर भी बीएमसी के इन समीकरणों पर पड़ सकता है।
महाविकास अघाड़ी (MVA) का साथ
उद्धव ठाकरे के इस ‘खेल’ में कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी:
- संयुक्त रणनीति: महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने संकेत दिया है कि बीएमसी चुनाव में वे मिलकर भाजपा-शिंदे गठबंधन को चुनौती देंगे।
- सीटों का तालमेल: यदि तीनों दल एकजुट रहते हैं, तो बहुमत का 114 का आंकड़ा पार करना उद्धव गुट के लिए काफी आसान हो सकता है।
बीएमसी को शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है और उद्धव ठाकरे के लिए यह साख की लड़ाई है। ‘हमारे पास सिर्फ 6 सीटें कम हैं’ वाला बयान यह दर्शाता है कि उद्धव खेमा रक्षात्मक होने के बजाय अब आक्रमण के मूड में है। आने वाले कुछ दिन मुंबई की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, जहाँ ‘इंतजार करिए’ वाला सस्पेंस किसी बड़े उलटफेर में बदल सकता है।





