पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज उस वक्त एक बेहद अजीब और तीखी स्थिति पैदा हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के बीच व्यक्तिगत छींटाकशी शुरू हो गई। सदन में अपनी बात रख रहे तेजस्वी यादव को बीच में टोकते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक आपा खो बैठे। मुख्यमंत्री ने तेजस्वी को संबोधित करते हुए कहा, “अरे बैठो, तुम बच्चा न है जी? हम तुम्हारे बाप के समय से राजनीति में हैं।” सीएम के इस बयान के बाद सदन में विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया, वहीं सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेज थपथपाकर मुख्यमंत्री का समर्थन किया।
विवाद की शुरुआत: कैसे शुरू हुई जुबानी जंग?
सदन की कार्यवाही के दौरान तेजस्वी यादव राज्य की कानून-व्यवस्था और नियुक्तियों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे:
- तेजस्वी का वार: तेजस्वी यादव ने दावा किया कि महागठबंधन सरकार के समय जो नियुक्तियां हुईं, उनका श्रेय वर्तमान सरकार लेना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।
- सीएम का पलटवार: तेजस्वी की बातों से असहज हुए नीतीश कुमार अपनी सीट से खड़े हो गए और उन्हें बैठने का इशारा करते हुए कहा कि उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है। उन्होंने तेजस्वी को उनके पिता लालू प्रसाद यादव और उनके पुराने संबंधों की याद दिलाई।
नीतीश कुमार के बयान के मुख्य अंश
मुख्यमंत्री ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा:
- अनुभव का हवाला: नीतीश कुमार ने कहा, “तुम अभी बच्चे हो, तुम्हें कुछ पता नहीं है। जब हम राजनीति कर रहे थे और तुम्हारे पिता के साथ काम कर रहे थे, तब तुम्हारा जन्म भी नहीं हुआ होगा।”
- काम का श्रेय: सीएम ने जोर देकर कहा कि बिहार में जो भी विकास हुआ है, वह उनके नेतृत्व में हुआ है और तेजस्वी केवल ‘प्रचार’ पाने की कोशिश कर रहे हैं।
- मर्यादा पर सवाल: नीतीश कुमार ने तेजस्वी को सदन की मर्यादा और वरिष्ठों का सम्मान करने की नसीहत भी दे डाली।
तेजस्वी यादव की प्रतिक्रिया: ‘यह मुख्यमंत्री की हताशा है’
सीएम के बयान के बाद सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने पलटवार किया:
- व्यक्तिगत हमला: तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री अब तर्क और आंकड़ों का जवाब नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए वे व्यक्तिगत हमलों और उम्र का सहारा ले रहे हैं।
- लोकतंत्र का अपमान: तेजस्वी ने कहा, “मैं जनता द्वारा चुना हुआ प्रतिनिधि और विपक्ष का नेता हूँ। सदन में मुझे ‘बच्चा’ कहना और मेरे पिता का नाम घसीटना मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है।”
सदन में हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित
इस नोकझोंक के बाद राजद (RJD) और अन्य विपक्षी दलों के विधायक सदन के बीचों-बीच (वेल) में आ गए और मुख्यमंत्री से माफी की मांग करने लगे। शोर-शराबे और बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया।
“बिहार की जनता देख रही है कि कैसे मुख्यमंत्री जी अपनी मर्यादा भूल रहे हैं। अगर वे मुझे बच्चा मानते हैं, तो उन्हें एक बच्चे के सवालों का जवाब आंकड़ों के साथ देना चाहिए, न कि गुस्से के साथ।” — तेजस्वी यादव, नेता प्रतिपक्ष
निष्कर्ष: चुनावी साल में बढ़ती कड़वाहट
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, बिहार की राजनीति में मर्यादा की दीवारें गिरती जा रही हैं। नीतीश और तेजस्वी के बीच की यह ‘बाप-बेटे’ वाली बहस आने वाले दिनों में चुनावी रैलियों में भी प्रमुख मुद्दा बन सकती है।





