पटना: बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला मोड़ आने जा रहा है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार अब बिहार की सत्ता की कमान छोड़कर देश की संसद के उच्च सदन, राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार, जेडीयू (JD-U) प्रमुख नीतीश कुमार आज (5 मार्च, 2026) पटना में अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इस घटनाक्रम को बिहार में ‘नीतीश युग’ की समाप्ति और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बढ़ते वर्चस्व के रूप में देखा जा रहा है। इस बड़े बदलाव के साथ ही बिहार को आजादी के बाद पहली बार पूर्णतः भाजपा समर्थित या भाजपा के कोटे का मुख्यमंत्री मिलने की संभावना प्रबल हो गई है।
नामांकन की तैयारी: अमित शाह की मौजूदगी में होगा शक्ति प्रदर्शन
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया आज बेहद खास होने वाली है:
- दिग्गजों का जमावड़ा: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज पटना पहुँच रहे हैं। उनकी मौजूदगी में नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के लिए अपना पर्चा भरेंगे।
- सहमति बनी: बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने के प्रस्ताव पर अपनी लिखित सहमति दे दी है। उनके साथ जेडीयू कोटे से रामनाथ ठाकुर भी नामांकन करेंगे।
- इस्तीफे की आहट: राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद (संभवतः 16 मार्च के बाद), नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं।
अगला मुख्यमंत्री कौन? भाजपा के पास होगी कमान
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के बाद बिहार की सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा:
- BJP का पहला मुख्यमंत्री: 2025 के विधानसभा चुनाव में 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा अब मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोकेगी। बिहार के इतिहास में यह पहली बार होगा जब भाजपा का कोई नेता सीधे तौर पर सूबे की कमान संभालेगा।
- निशांत कुमार की एंट्री: चर्चा है कि नीतीश कुमार के बेटे निशान्त कुमार को सक्रिय राजनीति में लाकर उन्हें डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। इससे जेडीयू के काडर को एकजुट रखने की कोशिश की जाएगी।
- संभावित नाम: भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नित्यानंद राय और सम्राट चौधरी जैसे दिग्गजों के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।
क्यों लिया यह फैसला? स्वास्थ्य और भविष्य की रणनीति
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, इस अप्रत्याशित कदम के पीछे कई गहरे कारण हैं:
- गिरता स्वास्थ्य: सूत्रों का दावा है कि 75 वर्षीय नीतीश कुमार का गिरता स्वास्थ्य अब उन्हें राज्य की भागदौड़ भरी राजनीति से दूर रहने पर मजबूर कर रहा है।
- सम्मानजनक विदाई: भाजपा के साथ हुए नए समझौते के तहत नीतीश कुमार को केंद्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी या उपराष्ट्रपति जैसे पद के लिए भी विचार किया जा सकता है।
- रिकॉर्ड का सिलसिला: राज्यसभा सदस्य बनते ही नीतीश कुमार के नाम एक दुर्लभ रिकॉर्ड दर्ज होगा—वे विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा, यानी चारों सदनों के सदस्य रहने वाले गिने-चुने नेताओं में शामिल हो जाएंगे।
विपक्ष का तंज: “रात भारी है”
इस सियासी हलचल पर विपक्षी खेमे, विशेषकर राजद (RJD) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है:
- मनोज झा का बयान: आरजेडी सांसद मनोज झा ने इसे ‘अपहरण’ जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि जेडीयू के लिए यह रात बहुत भारी होने वाली है।
- तेजस्वी की चुप्पी: फिलहाल तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव वेट-एंड-वॉच (Wait and Watch) की स्थिति में हैं, हालांकि वे इस बदलाव को भाजपा द्वारा जेडीयू को निगलने की कोशिश बता रहे हैं।





