बिंदुखत्ता (लालकुआं): उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले बिंदुखत्ता क्षेत्र में आज जनशक्ति का एक अभूतपूर्व प्रदर्शन देखने को मिला। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने और मालिकाना हक की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में भारी जन-सैलाब उमड़ पड़ा। स्थानीय आंकड़ों के अनुसार, लगभग 12 हजार से अधिक लोगों ने सड़कों पर उतरकर धामी सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी दशकों पुरानी जायज मांग को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में सरकार को बड़े राजनीतिक और सामाजिक विरोध का सामना करना पड़ेगा।
क्यों सुलग रहा है आंदोलन? मुख्य मांगें
बिंदुखत्ता की जनता लंबे समय से बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। आंदोलनकारियों ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सरकार को घेरा:
- राजस्व गांव का दर्जा: दशकों से बसे होने के बावजूद बिंदुखत्ता को अभी तक ‘राजस्व गांव’ घोषित नहीं किया गया है, जिसके कारण ग्रामीण सरकारी योजनाओं के पूर्ण लाभ से वंचित हैं।
- मालिकाना हक: निवासियों की मांग है कि उन्हें उनकी जमीन का मालिकाना हक (Land Ownership Rights) दिया जाए, ताकि वे अपने घरों और खेतों पर कानूनी अधिकार रख सकें।
- नगर निगम का विरोध: ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग क्षेत्र को नगर निगम में शामिल किए जाने के खिलाफ है। उनका तर्क है कि इससे उन पर करों (Taxes) का बोझ बढ़ेगा, जबकि बुनियादी सुविधाएं अभी भी नगण्य हैं।
महापंचायत का मंजर: नारों से गूंजा पूरा इलाका
सुबह से ही बिंदुखत्ता के अलग-अलग खत्तों (बस्तियों) से लोग टोलियों के रूप में आयोजन स्थल पर जुटने लगे थे:
- महिलाओं की सक्रिय भागीदारी: इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकत महिलाएं रहीं, जिन्होंने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और नारों के साथ सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला।
- दलगत राजनीति से ऊपर: आंदोलन में किसी एक दल का झंडा नहीं, बल्कि बिंदुखत्ता के हितों की मांग सर्वोपरि दिखी। पूर्व सैनिकों और किसानों ने भी बड़ी संख्या में शिरकत की।
- जाम की स्थिति: भारी भीड़ के कारण लालकुआं-बिंदुखत्ता मार्ग घंटों तक जाम रहा। पुलिस प्रशासन को यातायात सुचारू करने और भीड़ को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
सरकार को सीधी चेतावनी: ‘अब नहीं तो कभी नहीं’
आंदोलन की कमान संभाल रहे नेताओं ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि अब कोरे आश्वासनों का समय बीत चुका है:
- अल्टीमेटम: प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए एक निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की मांग की है।
- चुनाव पर असर: वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जनभावनाओं की अनदेखी की, तो क्षेत्र की जनता चुनाव में इसका कड़ा जवाब देगी।
- आंदोलन का विस्तार: स्थानीय नेताओं ने घोषणा की है कि यदि जल्द ही ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो बिंदुखत्ता की यह गूँज देहरादून स्थित सचिवालय तक सुनाई देगी।





