देहरादून/लालकुआं: नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता क्षेत्र के हजारों परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से चली आ रही ‘राजस्व ग्राम’ की मांग पर अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। हाल ही में हुए भारी जन-आंदोलन और स्थानीय प्रतिनिधियों के दबाव के बाद, शासन स्तर पर इस दिशा में कवायद तेज कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिंदुखत्ता के बाशिंदों को उनका जायज हक दिलाने के लिए कानूनी अड़चनों को दूर किया जा रहा है और जल्द ही इस संबंध में एक विस्तृत कार्ययोजना (Master Plan) सार्वजनिक की जाएगी।
सरकार की गंभीरता: मुख्यमंत्री ने दिए विशेष निर्देश
राजस्व विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस फाइल को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं:
- कानूनी बाधाओं का समाधान: बिंदुखत्ता की भूमि का बड़ा हिस्सा वन भूमि और अन्य श्रेणियों के अंतर्गत आता है। सरकार इन तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए विशेष पैनल गठित कर रही है।
- स्थानीय भावनाओं का सम्मान: सरकार का मानना है कि दशकों से बसे हुए इन परिवारों को बुनियादी सुविधाएं और मालिकाना हक देना राज्य की जिम्मेदारी है।
क्या होगा अगला कदम? (The Roadmap)
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया को अब चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा:
- भूमि सर्वेक्षण (Land Survey): सबसे पहले पूरे क्षेत्र का आधुनिक तकनीक (जैसे ड्रोन या सैटेलाइट मैपिंग) से डिजिटल सर्वेक्षण किया जाएगा ताकि प्रत्येक परिवार के कब्जे वाली भूमि का सटीक रिकॉर्ड तैयार हो सके।
- सीमांकन और वर्गीकरण: राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त टीम भूमि का सीमांकन करेगी। इसमें यह तय किया जाएगा कि कितनी भूमि को राजस्व श्रेणी में परिवर्तित किया जाना है।
- प्रस्ताव का कैबिनेट प्रस्तुतीकरण: जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट को राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही अधिसूचना (Notification) जारी की जाएगी।
- राजस्व अभिलेखों में दर्ज: अधिसूचना जारी होने के बाद, प्रत्येक निवासी को उनकी भूमि के खतौनी और पट्टे जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
राजस्व ग्राम बनने से क्या बदल जाएगा?
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलते ही वहां की पूरी व्यवस्था बदल जाएगी:
- मालिकाना हक: निवासियों को अपनी जमीन और मकान के कानूनी दस्तावेज मिलेंगे, जिससे वे अपनी संपत्ति को बेचने या विरासत में देने के अधिकारी होंगे।
- बैंक लोन की सुविधा: अब तक पक्के कागजात न होने के कारण बैंक यहां के निवासियों को होम लोन या बिजनेस लोन देने में कतराते थे, राजस्व ग्राम बनने के बाद यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
- बुनियादी ढांचे का विकास: राजस्व ग्राम घोषित होते ही केंद्र और राज्य सरकार की सभी विकास योजनाएं (जैसे पक्की सड़कें, जल जीवन मिशन और सरकारी स्कूल) सीधे तौर पर लागू हो सकेंगी।





