ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश के संसदीय चुनावों के नतीजों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात कर दिया है। मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनावों में ऐतिहासिक ‘बंपर’ जीत हासिल की है। इस जीत के साथ ही करीब 17 वर्षों तक निर्वासन और कानूनी लड़ाइयों का सामना करने वाले तारिक रहमान की स्वदेश वापसी और प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालना अब पूरी तरह तय हो गया है। शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग के लंबे शासन के अंत के बाद, ढाका की सड़कों पर जश्न का माहौल है। चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों ने स्पष्ट कर दिया है कि BNP गठबंधन को संसद में स्पष्ट बहुमत मिल चुका है।
चुनाव नतीजों और आगामी बदलाव की 10 बड़ी बातें
- ऐतिहासिक बहुमत: BNP और उसके सहयोगी दलों ने संसद की 300 सीटों में से दो-तिहाई से अधिक सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
- तारिक रहमान की वापसी: पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान, जो पिछले 17 वर्षों से लंदन में निर्वासन में थे, अब प्रधानमंत्री के रूप में देश की कमान संभालेंगे।
- अवामी लीग का सूपड़ा साफ: शेख हसीना के नेतृत्व वाली पार्टी को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी के कई दिग्गज नेता अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे।
- मतदान का स्वरूप: इस बार के चुनावों में युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले वोटरों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर रही, जिसे सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) का मुख्य कारण माना जा रहा है।
- खालिदा जिया की रिहाई का मार्ग प्रशस्त: BNP की जीत के साथ ही पार्टी सुप्रीमो और पूर्व पीएम खालिदा जिया के खिलाफ चल रहे मामलों की समीक्षा और उनकी पूर्ण रिहाई की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।
- अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण: चुनाव आयोग ने दावा किया है कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी रही, हालांकि विपक्षी गुटों ने कुछ छिटपुट हिंसा की शिकायतें दर्ज कराई थीं।
- आर्थिक सुधार प्राथमिकता: तारिक रहमान ने अपने शुरुआती संदेश में कहा है कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता देश की चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालना और महंगाई पर लगाम लगाना होगा।
- विदेश नीति पर नजर: जानकारों का मानना है कि नई सरकार के तहत बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़े बदलाव आ सकते हैं, खासकर भारत, चीन और अमेरिका के साथ संबंधों के संतुलन को लेकर।
- लोकतांत्रिक संस्थानों की बहाली: BNP ने अपने घोषणापत्र में न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को स्वतंत्र बनाने का वादा किया है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।
- सुरक्षा व्यवस्था कड़ी: जीत के बाद किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए पूरे बांग्लादेश में सेना और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कैसा होगा तारिक रहमान का ‘बांग्लादेश मॉडल’?
तारिक रहमान के सामने चुनौतियों का पहाड़ है। 17 साल बाद सत्ता में लौट रही BNP को न केवल प्रशासनिक ढांचे को फिर से खड़ा करना है, बल्कि जनता के बीच यह विश्वास भी पैदा करना है कि नई सरकार प्रतिशोध की राजनीति से ऊपर उठकर काम करेगी। अपने पहले भाषण में तारिक ने ‘राष्ट्रीय एकता’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन’ का नारा दिया है।
भारत के लिए क्या हैं मायने?
भारत सरकार ने बांग्लादेश के जनादेश का सम्मान किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। भारत के लिए प्राथमिकता सीमा सुरक्षा बनाए रखना और आर्थिक सहयोग को बिना किसी बाधा के जारी रखना होगा।




