ढाका: बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है। यह कदम उनके राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है। बांग्लादेश के कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
शाहाबुद्दीन ने हाल ही में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शाहाबुद्दीन को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है और उनके कार्यकाल को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आते रहे हैं।
कानून मंत्री के अनुसार, सरकार शाहाबुद्दीन के राष्ट्रपति बनने से पहले और कार्यकाल के दौरान सामने आए आरोपों की समीक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि आरोपों की पुष्टि होने पर कानून के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। जांच में वित्तीय अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को देखा जा रहा है।
मामले ने उस समय कानूनी बहस भी छेड़ दी है, जब कुछ आरोप राष्ट्रपति पद पर रहते हुए लगाए गए थे। बांग्लादेश के संविधान के तहत पद पर रहते हुए राष्ट्रपति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई को लेकर विशेष प्रावधान हैं। अब उनके पद छोड़ने के बाद इन मामलों पर आगे की प्रक्रिया को लेकर चर्चा हो रही है।
शाहाबुद्दीन के खिलाफ भ्रष्टाचार के अलावा कुछ अन्य शिकायतें भी सामने आई हैं। कुछ समूहों ने उनके कार्यकाल के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी की है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शाहाबुद्दीन के खिलाफ जांच बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद चल रही व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक समीक्षा का हिस्सा मानी जा रही है। फिलहाल सरकार ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई किसी राजनीतिक आधार पर नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।
शाहाबुद्दीन के मामले पर अब बांग्लादेश की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
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