क्वेटा/इस्लामाबाद: पाकिस्तान का अशांत प्रांत बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण रक्तपात का गवाह बना है। बलूच अलगाववादी समूहों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच छिड़ी इस ताजा जंग में पाकिस्तानी सेना को भारी क्षति पहुँचने की खबर है। बलूच विद्रोहियों ने एक बड़े हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उन्होंने अलग-अलग मुठभेड़ों और सुनियोजित हमलों में पाकिस्तानी सेना के 200 से अधिक फौजियों को मार गिराया है। विद्रोहियों ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि “हमारे खून की कीमत इतनी सस्ती नहीं है” और वे अपनी आजादी के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे। इस घटना ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और सरकार की नींद उड़ा दी है।
भीषण हमला और विद्रोहियों की रणनीति
स्थानीय सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विद्रोहियों ने पाकिस्तानी सेना की चौकियों और सप्लाई लाइनों को निशाना बनाया है:
- सुनियोजित घात (Ambush): विद्रोहियों ने ‘गुरिल्ला’ युद्ध नीति अपनाते हुए सैन्य काफिले पर उस समय हमला किया जब वे दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजर रहे थे।
- विस्फोटकों का उपयोग: हमलों में आईईडी (IED) और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे सेना के कई वाहन पूरी तरह तबाह हो गए।
- ‘नासूर’ बने बागी: पाकिस्तानी सेना के लिए ये विद्रोही अब एक लाइलाज नासूर बन गए हैं, क्योंकि वे स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाकर हमला करने के बाद पहाड़ों में ओझल हो जाते हैं।
“खून की कीमत”: विद्रोहियों का सख्त रुख
बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और अन्य संबंधित समूहों ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर अपनी मंशा साफ कर दी है:
- प्रतिशोध की आग: विद्रोहियों का कहना है कि यह हमला बलूच नागरिकों के गायब होने (Enforced Disappearances) और सेना द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन का बदला है।
- आर्थिक कॉरिडोर पर प्रहार: विद्रोही समूहों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिसे वे अपने संसाधनों की लूट मानते हैं।
पाकिस्तानी सेना का पक्ष और घेराबंदी
हालांकि पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (ISPR) ने हताहतों की इतनी बड़ी संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इलाके में जारी भारी सैन्य हलचल बड़े नुकसान की ओर इशारा कर रही है:
- सर्च ऑपरेशन: हमले के बाद पाकिस्तानी वायुसेना और विशेष कमांडो दस्ते ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। गनशिप हेलीकॉप्टरों के जरिए संदिग्ध ठिकानों पर बमबारी की खबरें भी मिल रही हैं।
- सेंसरशिप की कोशिश: पाकिस्तान सरकार ने प्रभावित इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं ताकि हताहतों की सटीक जानकारी बाहर न आ सके।
वैश्विक चिंता और मानवाधिकार
बलूचिस्तान में बढ़ती हिंसा पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
- नागरिकों की सुरक्षा: युद्ध जैसी स्थिति के कारण हजारों बलूच परिवार अपना घर छोड़ने को मजबूर हैं।
- क्षेत्रीय अस्थिरता: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और तेज होता है, तो इसका असर पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
“पाकिस्तानी सेना ने दशकों से बलूच लोगों का दमन किया है। अब उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि हमारे खून की कीमत बहुत भारी है। हम अपनी जमीन से कब्जा हटाने तक पीछे नहीं हटेंगे।” — प्रवक्ता, बलूच विद्रोही समूह





