Tuesday, March 3, 2026

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बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामला, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व रोक बरकरार रखी, अगली सुनवाई 2 दिसंबर को

नई दिल्ली/देहरादून। बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के बाद पूर्व में लगाई गई रोक को यथावत रखते हुए अगली सुनवाई की तिथि 2 दिसंबर निर्धारित कर दी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी अपील
यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब अब्दुल मतीन सिद्दीकी ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी जिसमें बनभूलपुरा क्षेत्र से रेलवे भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता ने लीव टू अपील दाखिल कर हाईकोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।

रेलवे, राज्य सरकार और कब्जेदारों की ओर से विस्तृत बहस
सुनवाई के दौरान रेलवे, उत्तराखंड सरकार और अतिक्रमित क्षेत्र के निवासियों—तीनों की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें कोर्ट के सामने रखीं।

रेलवे की दलील—30 हेक्टेयर भूमि अत्यावश्यक
रेलवे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने पैरवी करते हुए कहा कि रेलवे सेवाओं के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए 30 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि पर अवैध कब्जों के कारण विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, इसलिए अतिक्रमण हटाकर जमीन रेलवे को शीघ्र उपलब्ध कराई जानी चाहिए। रेलवे ने कोर्ट से इस दिशा में हस्तक्षेप का अनुरोध भी किया।

कब्जेदारों की दलील—मांगी गई भूमि मूल दावे का हिस्सा नहीं
दूसरी ओर, कब्जेदारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद, प्रशांत भूषण व अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखते हुए कहा कि रेलवे जिस भूमि की मांग कर रहा है, वह उसके पूर्व लिखित दावे में शामिल नहीं थी।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि रिटेनिंग वॉल बन जाने के बाद रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर को अब कोई खतरा नहीं है।

कब्जेदारों के वकीलों ने बनभूलपुरा के निवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्थानांतरित करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया और इसे अनुचित बताया। इस पर रेलवे की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

पूर्व स्थिति बनी रहेगी, अगली सुनवाई 2 दिसंबर
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक पूर्व में लगाई गई रोक जारी रहेगी और कोई भी कार्यवाही नहीं की जाएगी। मामले पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

बनभूलपुरा अतिक्रमण प्रकरण उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील भूमि-विवादों में से एक है, जिस पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

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