नरेन्द्रनगर/ऋषिकेश। भू-वैकुंठ भगवान बदरी विशाल के कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत मंगलवार को टिहरी रियासत के नरेन्द्रनगर राजदरबार में पौराणिक परंपरा का निर्वहन किया गया। भगवान बदरीनाथ के नित्य प्रति होने वाले महाभिषेक पूजन के लिए प्रयुक्त होने वाले तिलों के तेल को पिरोने की पवित्र रस्म विधि-विधान के साथ शुरू हुई। इस धार्मिक अनुष्ठान में टिहरी सांसद और राजमाता माला राज्य लक्ष्मी शाह के साथ अन्य सुहागिन महिलाओं ने भाग लिया।
राजसी परंपरा और ‘गाडू घड़ा’ का महत्व
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, भगवान बदरी विशाल के अभिषेक के लिए प्रयुक्त होने वाला तेल केवल राजदरबार में ही सुहागिन महिलाओं द्वारा तैयार किया जाता है।
- तिल का तेल और शुद्धता: राजदरबार की रसोई में पूरी शुद्धता और मंत्रोच्चार के बीच तिलों को कूटकर तेल निकाला जाता है।
- गाडू घड़ा (तेल कलश): पिरोए गए इस पवित्र तेल को ‘गाडू घड़ा’ (तेल कलश) में भरा जाएगा। यह कलश बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के दिन तक विशेष सुरक्षा और श्रद्धा के साथ रखा जाता है।
सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने किया नेतृत्व
राजदरबार में आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने सुहागिन महिलाओं के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और मंगल गीतों के बीच तिलों को पिरोने का कार्य संपन्न किया।
“भगवान बदरी विशाल की सेवा का यह सौभाग्य पीढ़ियों से राजदरबार को मिलता रहा है। यह तेल कपाट खुलने के दिन भगवान के प्रथम अभिषेक में प्रयुक्त होगा, जो हमारे लिए अत्यंत गौरव और श्रद्धा का विषय है।”
22 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट
इस रस्म के साथ ही चारधाम यात्रा की धार्मिक औपचारिकताएं अपने अंतिम चरण में पहुँच गई हैं।
- कपाट खुलने की तिथि: भगवान बदरी विशाल के कपाट इस वर्ष 22 अप्रैल को ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
- कलश यात्रा: राजदरबार से तैयार यह ‘गाडू घड़ा’ जल्द ही ऋषिकेश और श्रीनगर होते हुए पांडुकेश्वर पहुंचेगा, जहाँ से इसे उत्सव डोली के साथ बदरीनाथ धाम ले जाया जाएगा।
इस अवसर पर राजपरिवार के सदस्यों के साथ-साथ बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के पदाधिकारी और स्थानीय श्रद्धालु भी उपस्थित रहे। पूरे राजदरबार परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।





