देहरादून। दून घाटी में आई आपदा ने कई घरों को उजाड़ दिया है। टोंस नदी में हुए हादसे के बाद अब दूसरी सबसे बड़ी त्रासदी मालदेवता क्षेत्र के फुलेत गांव से सामने आई है। यहां एक मकान के मलबे में सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के छह लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
सात घंटे पैदल चलकर पहुंची SDRF
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण फुलेत गांव तक सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। मोबाइल नेटवर्क भी ठप है। पुलिस संपर्क नहीं कर पाई तो SDRF की टीम ने पगडंडियों से होते हुए करीब 16 किलोमीटर का कठिन रास्ता पैदल तय किया। इस सफर में उन्हें सात घंटे लग गए। मंगलवार देर शाम तक जब टीम गांव पहुंची तो वहां अंधेरा और बिजली गुल होने के कारण खोज अभियान शुरू नहीं हो सका। बुधवार सुबह SDRF ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
मैन्युअल तरीके से हट रहा है मलबा
ग्रामीणों के अनुसार, लापता लोग एक मकान में मौजूद थे, जिस पर भूस्खलन से आया मलबा गिर गया। यहां पांच से छह फीट तक मलबा जमा हो चुका है। बड़े-बड़े पत्थरों और भारी मात्रा में मलबे की वजह से SDRF को मशीनों के बजाय हाथों से मलबा हटाना पड़ रहा है। टीम को पूरे दिन कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, लेकिन देर शाम तक किसी भी व्यक्ति का पता नहीं चल सका। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर बड़ी मशीनों को भी वहां पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।
फुलेत में लापता लोग
- सुरेंद्र (44 वर्ष), पुत्र तेलूराम, निवासी मुजफ्फराबाद, सहारनपुर
- विकास कुमार (28 वर्ष), पुत्र पलटू राम, निवासी मीरपुर शेरपुर, सहारनपुर
- श्यामलाल (65 वर्ष), पुत्र फूल सिंह, निवासी मीरपुर शेरपुर, सहारनपुर
- धर्मेंद्र (42 वर्ष), पुत्र ध्यान सिंह, निवासी मीरपुर शेरपुर, सहारनपुर
- मिथुन (39 वर्ष), पुत्र सेवाराम, निवासी मीरपुर शेरपुर, सहारनपुर
- सचिन (36 वर्ष), पुत्र विशम्बर, निवासी ग्राम गंदेवाड़ा, पोस्ट छुटमलपुर, थाना फतेहपुर, सहारनपुर
पहले टोंस नदी में हुआ था सबसे बड़ा हादसा
गौरतलब है कि मंगलवार सुबह टोंस नदी में आपदा का सबसे बड़ा हादसा हुआ, जब एक साथ 15 लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली समेत तेज धारा में बह गए। इसके बाद फुलेत गांव की यह घटना दून घाटी में दूसरा सबसे बड़ा हादसा साबित हो रही है।
गांव में कई दुकानें भी मलबे में दब गई हैं। वहीं, लापता लोगों के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंचकर अपने प्रियजनों की तलाश में जुटे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि राहत व बचाव कार्य लगातार जारी है और किसी भी संभावना को छोड़ने का प्रयास नहीं किया जाएगा।





