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प्रियंका गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला: पूछा—क्या भाजपा की सुविधा के हिसाब से तय हुआ इलेक्शन शेड्यूल?

नई दिल्ली (16 मार्च, 2026): देश के विभिन्न राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों की तारीखों के एलान के साथ ही राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए कार्यक्रम की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मतदान की तारीखों और चरणों (Phases) का निर्धारण जनता की सहूलियत के बजाय सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक सुविधा और उनके बड़े नेताओं के प्रचार अभियान को ध्यान में रखकर किया गया है।

तारीखों के चयन पर उठाए सवाल: ‘पैटर्न’ की ओर इशारा

प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से चुनाव आयोग के फैसले को ‘एकतरफा’ करार दिया। उन्होंने चुनाव कार्यक्रम के ढांचे पर मुख्य रूप से तीन आपत्तियां दर्ज की हैं:

  • भाजपा की सुविधा का आरोप: प्रियंका ने कहा कि चुनाव के चरणों को इस तरह से बांटा गया है जिससे प्रधानमंत्री और भाजपा के अन्य स्टार प्रचारकों को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में रैलियां करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
  • लंबा चुनाव कार्यक्रम: उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ राज्यों में जहां कम चरणों में चुनाव हो सकते थे, वहां प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा गया है, ताकि संसाधनों का फायदा सत्ता पक्ष को मिल सके।
  • संस्थानों की निष्पक्षता: प्रियंका ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष दिखना चाहिए, लेकिन मौजूदा शेड्यूल को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह भाजपा मुख्यालय में तैयार किया गया हो।

राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस

प्रियंका गांधी के इस बयान ने विपक्षी खेमे को लामबंद कर दिया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को ‘हार की हताशा’ बताया है:

  1. विपक्ष का समर्थन: विपक्षी गठबंधन (I.N.D.I.A.) के कई नेताओं ने प्रियंका के सुर में सुर मिलाते हुए कहा है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चरणों के निर्धारण का वैज्ञानिक आधार क्या है।
  2. भाजपा का पलटवार: भाजपा के प्रवक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा चुनाव हारने से पहले बहाने ढूंढने लगती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।

चुनाव आयोग का रुख

हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक प्रियंका गांधी के व्यक्तिगत बयान पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन आयोग के सूत्रों का कहना है कि चुनाव की तारीखें सुरक्षा बलों की उपलब्धता, स्थानीय त्योहारों, खेती के सीजन और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं।

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