दोहा/यरुशलम। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने इस्राइल के हालिया हमलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अल थानी ने कहा कि दोहा में हमास के ठिकानों को निशाना बनाकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने न केवल कतर की संप्रभुता का उल्लंघन किया है, बल्कि बंधकों की सुरक्षित रिहाई की संभावनाओं को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
“बंधकों के लिए सभी प्रयास अब व्यर्थ”
अल थानी ने साफ कहा कि दोहा पर हमला एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसने शांति और मध्यस्थता की हर संभावना को कमजोर कर दिया है। उनके अनुसार, कतर लंबे समय से गाजा संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था और बंधकों की रिहाई के लिए कई दौर की वार्ताएं चल रही थीं। लेकिन इस्राइली कार्रवाई ने उन प्रयासों को ध्वस्त कर दिया।
कतर का कड़ा रुख
कतर के प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह इस्राइल को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराए। उन्होंने कहा कि किसी भी देश की राजधानी पर इस तरह का हमला न केवल अस्वीकार्य है बल्कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ेगी। अल थानी ने चेतावनी दी कि यदि इस्राइल अपनी कार्रवाइयों से पीछे नहीं हटता तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और गहरा सकता है।
नेतन्याहू की नीति पर सवाल
अल थानी ने कहा कि नेतन्याहू सरकार की यह नीति “बंधकों को बचाने की बजाय राजनीतिक फायदे के लिए संघर्ष को भड़काने” पर केंद्रित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस्राइल बंधकों की चिंता करने की बजाय सैन्य दबदबा दिखाने में ज्यादा रुचि रखता है।
क्या होगा आगे?
विश्लेषकों का मानना है कि इस्राइल-कतर रिश्तों में यह हमला निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। कतर अब तक हमास और पश्चिमी देशों के बीच एक प्रमुख संवाद सेतु रहा है, लेकिन हालिया हमले ने इस भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। इसके चलते बंधकों की रिहाई की संभावनाएं बेहद धुंधली हो गई हैं।





