Wednesday, March 4, 2026

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पौड़ी और नैनीताल की तीन नदियों को मिलेगा नया जीवन; शासन ने जीर्णोद्धार हेतु ₹5.19 करोड़ की राशि को दी मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड की नैसर्गिक नदियों और जल स्रोतों को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। शासन ने पौड़ी और नैनीताल जिलों की तीन महत्वपूर्ण नदियों के पुनर्जीवन (Rejuvenation) कार्यों के लिए ₹5.19 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस निर्णय से न केवल इन नदियों के जल स्तर में सुधार होगा, बल्कि आसपास के पारिस्थितिक तंत्र को भी नया जीवन मिलेगा।

इन तीन नदियों का होगा कायाकल्प

सरकार द्वारा स्वीकृत की गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण नदियों के बहाव और जल संरक्षण कार्यों के लिए किया जाएगा:

  • पौड़ी जिला: यहां की महत्वपूर्ण नदियों में शुमार नयार नदी के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • नैनीताल जिला: यहां की कोसी और शिप्रा नदी के पुनर्जीवन हेतु विस्तृत योजना तैयार की गई है। शिप्रा नदी, जो पिछले कुछ वर्षों से अस्तित्व के संकट से जूझ रही है, उसके लिए यह स्वीकृति अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य और कार्य

शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस बजट का उपयोग वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण के लिए किया जाएगा। योजना के तहत निम्नलिखित कार्य प्राथमिकता पर रहेंगे:

  1. चेक डैम का निर्माण: नदियों के पानी की गति को नियंत्रित करने और भूजल पुनर्भरण (Groundwater recharge) के लिए छोटे चेक डैम बनाए जाएंगे।
  2. वृक्षारोपण: नदियों के किनारों पर व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा ताकि मिट्टी के कटाव को रोका जा सके।
  3. गाद की सफाई: नदियों के तल में जमा सिल्ट और कचरे को हटाकर उनके प्राकृतिक मार्ग को सुधारा जाएगा।
  4. खाल-खालों का जीर्णोद्धार: पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक जल संचयन विधियों को पुनर्जीवित किया जाएगा।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि इन नदियों के पुनर्जीवित होने से स्थानीय कृषि और पर्यटन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। गर्मियों के दौरान होने वाली पानी की किल्लत से निजात मिलेगी और साथ ही जंगली जानवरों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘जल संचय-जीवन संचय’ के संकल्प के तहत इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस प्रशासनिक कदम से पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर है, क्योंकि ये नदियां इन दोनों जिलों की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

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