सुल्तानपुर/लखनऊ: भारतीय वायुसेना ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर अपनी रणनीतिक और युद्धक क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन किया। सुल्तानपुर जिले के अखलीकिरी करवत गांव के समीप निर्मित 3.2 किलोमीटर लंबी विशेष एयरस्ट्रिप पर वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने ‘टच-एंड-गो’ ऑपरेशन के साथ आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाए। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्ध या आपातकालीन स्थितियों में राष्ट्रीय राजमार्गों को रनवे के रूप में उपयोग करने की वायुसेना की तत्परता और परिचालन क्षमता को परखना है।
फाइटर जेट्स का शक्ति प्रदर्शन: सुखोई से लेकर तेजस तक शामिल
इस युद्धाभ्यास में वायुसेना के बेड़े के सबसे घातक और आधुनिक विमानों ने हिस्सा लिया।
- लड़ाकू विमान: हवा को चीरते हुए सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, जगुआर और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस ने एयरस्ट्रिप पर लैंडिंग और टेक-ऑफ का अभ्यास किया।
- परिवहन विमान: लड़ाकू विमानों के साथ-साथ भारी मालवाहक विमान सी-295 और एएन-32 (AN-32) ने भी हाईवे पर अपनी लैंडिंग क्षमताओं का प्रदर्शन किया, जो सेना की रसद आपूर्ति क्षमता को दर्शाता है।
दो चरणों में अभ्यास: रात 9 बजे तक थमेगी नहीं गूंज
वायुसेना ने इस बार के अभ्यास को अधिक चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए इसे दो चरणों में विभाजित किया है।
- डे-एंड-नाइट ड्रिल: यह युद्धाभ्यास न केवल दिन के उजाले में बल्कि रात के अंधेरे में भी आयोजित किया जा रहा है।
- रात्रि अभ्यास: रात 9 बजे तक चलने वाले इस दूसरे चरण में पायलट ‘नाइट विजन’ और आधुनिक उपकरणों की सहायता से अंधेरे में रनवे की पहचान और लैंडिंग का कठिन अभ्यास करेंगे।
सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम और ट्रैफिक डायवर्जन
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इस आयोजन को लेकर प्रशासन और वायुसेना ने सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की है।
- 12 किमी का हिस्सा सील: सुरक्षा कारणों से पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के 12 किलोमीटर लंबे हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
- ट्रैफिक डायवर्जन: आम जनता की सुविधा के लिए इस मार्ग पर चलने वाले यातायात को 1 मई तक के लिए डायवर्ट किया गया है। वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जा रहा है ताकि एयरस्ट्रिप के आसपास कोई बाधा उत्पन्न न हो।
- कड़ी निगरानी: एयरस्ट्रिप के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और परिंदा भी पर न मार सके, ऐसी निगरानी रखी जा रही है।
आपातकालीन स्थितियों के लिए मील का पत्थर
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के युद्धाभ्यास भारत की रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि युद्ध जैसी स्थिति में मुख्य एयरबेस दुश्मन के निशाने पर होते हैं, तो ये एक्सप्रेस-वे ‘अल्टरनेटिव एयरबेस’ (वैकल्पिक हवाई पट्टी) के रूप में काम आएंगे। उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेस-वे अब न केवल सुगम यातायात का साधन हैं, बल्कि देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा में भी एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरे हैं।





