लाहौर। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में हुए विधानसभा चुनावों को लेकर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आयोग की तथ्य-जांच रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य की ओर से अनुपातहीन बल प्रयोग, संचार प्रतिबंध और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई गई है।
HRCP के अनुसार, क्षेत्र में हालिया अशांति के पीछे लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक असंतोष, संस्थागत अविश्वास और शासन से जुड़ी समस्याएं प्रमुख कारण हैं। आयोग ने कहा कि राज्य की टकरावपूर्ण प्रतिक्रिया ने स्थिति को और गंभीर बनाया तथा जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाया।
चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल
पीओके विधानसभा की 45 सीटों के लिए चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन चरणों में हुए। कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण सात सीटों पर मतदान स्थगित करना पड़ा। HRCP ने कहा कि भारी सुरक्षा तैनाती, लंबे समय तक संचार प्रतिबंध, प्रमुख राजनीतिक समूहों के बहिष्कार और कुछ सीटों पर मतदान टलने से चुनावी माहौल की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक सवाल खड़े हुए हैं।
हालांकि, आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने बाग जिले में जिन मतदान केंद्रों का दौरा किया, वहां मतदाताओं को व्यवस्थित तरीके से मतदान करते पाया। कुछ क्षेत्रों में कम मतदान को मतदाताओं का स्वैच्छिक बहिष्कार और राजनीतिक निराशा बताया गया, न कि मतदान से जबरन रोकने का परिणाम।
हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग
HRCP ने जून 2026 से अब तक हुई मौतों और गंभीर चोटों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। आयोग ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानूनों तथा हिरासत संबंधी प्रावधानों के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है।
आयोग ने सरकार से सभी पक्षों को शामिल करते हुए राजनीतिक संवाद शुरू करने और क्षेत्र की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए करने की अपील की है। साथ ही 2026 की चुनावी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की सिफारिश की गई है।




