नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागीन खुरेलसुख के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में व्यापक स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति, रक्षा और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। वार्ता के बाद भारत और मंगोलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
वार्ता के बाद संयुक्त बयान जारी करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और मंगोलिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हजारों वर्ष पुराने हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और पारस्परिक विश्वास के आधार पर अपने रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनमें नवीकरणीय ऊर्जा, कोयला एवं खनन, आईटी और डिजिटल नवाचार, शिक्षा आदान-प्रदान, और सांस्कृतिक संरक्षण से जुड़े एमओयू शामिल हैं। इसके साथ ही दोनों देशों ने तेल रिफाइनरी परियोजना में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की, जिसमें भारत तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख ने भारत के प्रति आभार जताते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध ‘स्पिरिचुअल पार्टनरशिप’ पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमारे लिए सिर्फ एक रणनीतिक साझेदार नहीं, बल्कि विश्वसनीय मित्र भी है।”
दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। इसमें इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता, आतंकवाद विरोधी सहयोग, और सतत विकास लक्ष्यों पर साझा दृष्टिकोण शामिल था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मंगोलिया भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘सागर विजन’ में एक महत्वपूर्ण भागीदार है। उन्होंने भरोसा जताया कि हाल के समझौते दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई दिशा देंगे।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक के जरिए भारत और मंगोलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। वार्ता के अंत में दोनों नेताओं ने यह विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।





