नई दिल्ली। देश में पासपोर्ट सेवाओं में तकनीकी सुधार और डिजिटल व्यवस्था के बावजूद पुलिस सत्यापन प्रक्रिया में रिश्वतखोरी की शिकायतें अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। एक हालिया सर्वे में जहां अधिकांश नागरिकों ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों की कार्यप्रणाली की सराहना की, वहीं पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
लोकल सर्किल्स द्वारा 269 जिलों के 33 हजार से अधिक लोगों पर किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, 81 प्रतिशत नागरिकों ने पासपोर्ट सेवा केंद्रों का अनुभव तेज, पारदर्शी और नागरिक हितैषी बताया। वहीं केवल 5 प्रतिशत लोगों ने सेवा को खराब और 14 प्रतिशत ने औसत बताया।
हालांकि सर्वे में सामने आया कि पुलिस सत्यापन के दौरान 58 प्रतिशत लोगों को किसी न किसी रूप में रिश्वत या उपहार देना पड़ा। इनमें 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनसे रिश्वत मांगी गई, जबकि 24 प्रतिशत ने काम जल्दी कराने के लिए स्वयं भुगतान किया। 38 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनसे न तो रिश्वत मांगी गई और न ही उन्होंने दी।
एक जुलाई से पासपोर्ट शुल्क में वृद्धि भी लागू होने जा रही है। इसके साथ ही नागरिक बेहतर, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त सेवाओं की अपेक्षा कर रहे हैं। सर्वे में लोगों ने पुलिस सत्यापन को पूरी तरह डिजिटल या फेसलेस बनाने, मोबाइल ऐप आधारित सत्यापन प्रणाली लागू करने तथा स्थानीय पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने की मांग की है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि नागरिक चाहते हैं कि पासपोर्ट सेवा जैसी पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था संपत्ति पंजीकरण, वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी सेवाओं में भी लागू की जाए, ताकि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।





