इस्लामाबाद। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने घोषणा की है कि वह मानवीय सहायता और शांति बहाली अभियान के तहत गाज़ा में सैनिक तैनात करेगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्र में संघर्ष लगातार गहरा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाज़ा में मानवाधिकार स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जता रहा है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इशाक डार ने कहा कि गाज़ा में सैनिक भेजने का उद्देश्य किसी भी सैन्य गुट के खिलाफ ऑपरेशन चलाना नहीं, बल्कि मानवीय राहत और सुरक्षा सहायता प्रदान करना है।
डार ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान की भूमिका सिर्फ मानवीय आधार पर होगी और इसका लक्ष्य स्थानीय आबादी की सुरक्षा और राहत कार्यों को मजबूती देना है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का मकसद किसी संगठन या गुट से समर्पण करवाना नहीं है। “हमास से समर्पण करवाना हमारा काम नहीं है,” उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा। डार के इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि पाकिस्तानी सेना की संभावित तैनाती किसी भी संघर्षपक्ष के खिलाफ कार्रवाई का हिस्सा नहीं होगी।
पाकिस्तान सरकार ने गाज़ा में बढ़ती तबाही और लगातार बिगड़ती मानवीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाने चाहिए। डार ने बताया कि पाकिस्तान पहले ही खाद्य सामग्री, दवाइयों और आवश्यक मेडिकल उपकरणों की बड़ी खेप भेज चुका है, और अब सैनिकों की तैनाती से राहत कार्यों को और मजबूती मिलेगी।
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान का यह कदम कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे वह मुस्लिम दुनिया में अपनी भूमिका और स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, यह संभावना भी जताई जा रही है कि गाज़ा में गैर-लड़ाकू भूमिकाओं में सैनिक भेजने का निर्णय अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र के समन्वय के तहत ही लागू होगा।
उधर, इस फैसले को लेकर पाकिस्तान के भीतर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे तनावपूर्ण क्षेत्र में पाकिस्तानी सैनिकों की मौजूदगी उन्हें जोखिम में डाल सकती है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि यह कदम गाज़ा के लोगों को बड़ी राहत प्रदान करेगा।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान ने साफ कर दिया है कि गाज़ा में उसकी भूमिका मानवता आधारित सहायता तक सीमित रहेगी। अब दुनिया की नजर इस पर है कि पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती कब और किस रूप में आगे बढ़ाई जाती है।





