लोकसभा में शुक्रवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान को लेकर जवाब दिया। विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार पर भारत बारीकी से नजर रखता है। साथ ही इसे समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाता रहता है। लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध और अत्याचार को लेकर पूछे गए प्रश्न का विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया। उन्होंने फरवरी में पाकिस्तान में हुए अत्याचार के 10 मामलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैं माननीय सदस्य की भावनाओं के प्रति सहानुभूति रखता हूं। इस प्रश्न के दो भाग हैं। पहला कि क्या हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे अपराध और अत्याचारों पर नजर रखते हैं और दूसरा किया हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके बारे में क्या कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार पर बहुत बारीकी से नजर रखते हैं। फरवरी 2025 में हिंदू समुदाय के खिलाफ अत्याचार के 10 मामले और सिख समुदाय से संबंधित तीन घटनाएं हुईं। ईसाई समुदाय से संबंधित एक मामला था। एक ईसाई व्यक्ति पर पाकिस्तान में ईशनिंदा का आरोप लगा था।
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान में सिख समुदाय से जुड़ी तीन घटनाएं हुईं। एक मामले में सिख परिवार पर हमला किया गया। दूसरे मामले में पुराने गुरुद्वारे को फिर खोलने पर सिख परिवार को धमकाया गया। अहमदिया समुदाय से संबंधित दो मामले थे। इसमें एक मामले में मस्जिद को सील कर दिया गया था। दूसरे मामले में 40 कब्रों को अलग किया गया था। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत इन मामलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में हमारे प्रतिनिधि ने बताया कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां मानवाधिकारों का हनन, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और लोकतांत्रिक मूल्यों का व्यवस्थित क्षरण राज्य की नीतियां हैं, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुमोदित आतंकवादियों को पनाह देती है। ऐसे में पाकिस्तान किसी को भी उपदेश देने की स्थिति में नहीं है। इसके बजाय पाकिस्तान को अपने लोगों को वास्तविक शासन और न्याय देने पर ध्यान देना चाहिए।