Wednesday, February 11, 2026

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पाकिस्तान के आसमान में 19 साल बाद फिर दिखेंगे पेंच: शहबाज सरकार ने पतंगबाजी से हटाया प्रतिबंध; बसंत उत्सव की तैयारियों में जुटा लाहौर

इस्लामाबाद/लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत, विशेषकर लाहौर की ऐतिहासिक पहचान रहा ‘बसंत उत्सव’ और पतंगबाजी एक बार फिर कानूनी रूप से बहाल होने जा रही है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने सुरक्षा और कानूनी अड़चनों के कारण पिछले 19 वर्षों से लागू प्रतिबंध को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। साल 2005 से प्रतिबंधित रही पतंगबाजी को अब कड़े नियमों और सुरक्षा मानकों के साथ फिर से शुरू करने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से न केवल पतंगबाजी के शौकीनों में खुशी की लहर है, बल्कि दम तोड़ चुके पतंग उद्योग से जुड़े लाखों लोगों को रोजगार की नई उम्मीद जगी है।

प्रतिबंध का इतिहास: क्यों बंद हुई थी पतंगबाजी?

पाकिस्तान में पतंगबाजी पर रोक लगाने के पीछे सुरक्षा और धार्मिक कारण प्रमुख थे:

  • खूनी धागा (Chemical String): 2000 के दशक की शुरुआत में कांच और रसायनों से लिपटी डोर (मांझा) के कारण कई लोगों, विशेषकर बाइक सवारों के गले कटने की घटनाएं सामने आई थीं।
  • सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: साल 2005 में पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने जान-माल की सुरक्षा को देखते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
  • हवाई फायरिंग और हुड़दंग: बसंत के दौरान होने वाली हवाई फायरिंग और छतों से गिरने की घटनाओं ने भी इस पारंपरिक उत्सव को विवादित बना दिया था।

शहबाज सरकार की नई गाइडलाइन: ‘शर्तों के साथ मिलेगी आजादी’

सरकार ने पतंगबाजी को बहाल करने के साथ ही बेहद सख्त नियम लागू किए हैं ताकि पुरानी गलतियां न दोहराई जाएं:

  1. धागे पर नियंत्रण: केवल सूती और बिना रसायनों वाली डोर के उपयोग की अनुमति होगी। धातु या प्लास्टिक के धागे का निर्माण और बिक्री करने वालों पर भारी जुर्माना और जेल का प्रावधान किया गया है।
  2. स्थान का निर्धारण: प्रशासन कुछ बड़े पार्कों और खुले मैदानों को पतंगबाजी के लिए चिन्हित करेगा, ताकि मुख्य सड़कों पर बाइक सवारों को कोई खतरा न हो।
  3. समय की पाबंदी: बसंत उत्सव के दौरान पतंगबाजी केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक ही की जा सकेगी, रात में लाइटिंग वाली पतंगों और हवाई फायरिंग पर सख्त पाबंदी रहेगी।

आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू

इस फैसले के पीछे पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था को सहारा देना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है:

  • पर्यटन को बढ़ावा: बसंत उत्सव के दौरान कभी दुनिया भर से पर्यटक लाहौर आते थे। सरकार को उम्मीद है कि इस सांस्कृतिक बहाली से विदेशी मुद्रा और पर्यटन में इजाफा होगा।
  • रोजगार का सृजन: पतंग और धागा बनाने वाले कारीगरों का मानना है कि इस उद्योग के फिर से शुरू होने से लाहौर और आसपास के इलाकों में हजारों परिवारों को रोजी-रोटी मिलेगी।

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