नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति और गहराते मानवीय संकट के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री राब जेटन से टेलीफोन पर विस्तार से बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र की मौजूदा गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और जल्द से जल्द शांति व स्थिरता बहाल करने की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया। यह बातचीत भारत द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता सर्वोच्च प्राथमिकता
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री जेटन ने पश्चिम एशिया में जारी हिंसा और अस्थिरता के प्रभावों पर गहन चर्चा की। उन्होंने सहमति व्यक्त की कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके और मानवीय सहायता पहुँचाई जा सके। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया और सभी पक्षों से संयम बरतने व बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की अपील की।
भारत-नीदरलैंड्स रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई ऊँचाई
प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस बातचीत की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह बातचीत भारत-नीदरलैंड्स संबंधों को और मज़बूत बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण रही। उन्होंने बताया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच मौजूदा रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, कृषि और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की राह
यह टेलीफोनिक बातचीत भारत और नीदरलैंड्स के बीच बढ़ते राजनयिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती है। नीदरलैंड्स यूरोपीय संघ में भारत के प्रमुख व्यापारिक भागीदारों में से एक है, और दोनों देश वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने के इच्छुक हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में भारत की सक्रिय भागीदारी को और मज़बूत करती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर काम करने का संदेश देती है।
पश्चिम एशिया संकट पर भारत का रुख़ हमेशा से स्पष्ट रहा है—हिंसा का अंत, मानवीय सहायता की पहुँच, और बातचीत के माध्यम से स्थायी समाधान। नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री के साथ यह बातचीत इसी दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है।





