बगदाद/वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच इराक ने अपनी संप्रभुता को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ फोन पर हुई बातचीत में स्पष्ट कर दिया कि इराक की जमीन, आसमान और पानी का इस्तेमाल किसी भी देश पर हमले के लिए नहीं होना चाहिए। अल-सुदानी ने जोर देकर कहा कि उनका देश इस क्षेत्रीय युद्ध में किसी भी पक्ष के लिए ‘लॉन्च पैड’ बनने को तैयार नहीं है।
इराक की दो टूक: ‘दुश्मनी का जरिया नहीं बनेंगे’
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री अल-सुदानी ने अमेरिकी विदेश मंत्री से कूटनीतिक बातचीत के दौरान इराक की तटस्थता पर जोर दिया:
- संप्रभुता की रक्षा: सुदानी ने स्पष्ट किया कि इराक की सीमाओं का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है।
- क्षेत्रीय युद्ध से दूरी: उन्होंने कहा कि इराक पहले से ही कई संकटों से जूझ रहा है और वह इस वैश्विक तनाव में ‘दुश्मनी फैलाने का जरिया’ नहीं बनना चाहता।
- तीन मोर्चों पर पाबंदी: प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, इराक ने अपनी जमीन, वायु क्षेत्र (Airspace) और समुद्री सीमाओं के किसी भी युद्धक उपयोग पर सख्त आपत्ति जताई है।
ईरान का पलटवार: इराक स्थित अमेरिकी बेस पर दागी मिसाइलें
यह कूटनीतिक बातचीत ऐसे समय में हुई है जब युद्ध की लपटें इराक के भीतर स्थित अमेरिकी ठिकानों तक पहुँच गई हैं:
- मिसाइल हमला: ईरान ने आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी ली है कि उसने इराक में स्थित अमेरिकी एयर बेस पर पांच बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं।
- अस्थिर सुरक्षा: युद्ध शुरू होने के बाद से इराक के आसमान में कई देशों की मिसाइलें और लड़ाकू विमानों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे इराक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
- अमेरिका की चुनौती: अमेरिका के लिए इराक में अपने ठिकानों की सुरक्षा करना और साथ ही इराकी सरकार के साथ कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
युद्ध के बीच कूटनीतिक खींचतान
विशेषज्ञों का मानना है कि अल-सुदानी का यह बयान अमेरिका और ईरान दोनों के लिए एक संदेश है। इराक नहीं चाहता कि उसकी धरती दो महाशक्तियों के बीच ‘बैटलग्राउंड’ में तब्दील हो जाए। मार्को रुबियो के साथ हुई इस बातचीत को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका इस क्षेत्र में अपने ऑपरेशंस को विस्तार देने की योजना बना रहा है, जबकि इराक अपनी सीमाओं को सील रखना चाहता है।





