नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद के मानसून सत्र का औपचारिक सत्रावसान नहीं किए जाने पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। साथ ही सरकार को चेतावनी दी है कि किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को जल्दबाजी में या जबरन पारित कराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
मानसून सत्र के सत्रावसान में देरी पर सवाल
खरगे ने अपने पत्र में कहा कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। उन्होंने इस देरी को असामान्य बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष का यह पत्र ऐसे समय आया है, जब संसद में महिला आरक्षण कानून को लागू करने और परिसीमन से संबंधित नए प्रस्तावों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग
खरगे ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि परिसीमन के प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय लेने और उन्हें संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक की जाए। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
उनका कहना है कि परिसीमन का देश के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श जरूरी है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख
खरगे ने पत्र में कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जानी चाहिए। राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को भी इसी अवधि तक बनाए रखने की मांग की गई है।
उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव से ही महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की बात कही।
गौरतलब है कि अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाया था। अब नए प्रस्तावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच फिर से राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।




