मुंबई/पुणे: बारामती में हुए विमान हादसे की भयावहता के बीच अब इसमें जान गंवाने वाले लोगों के घरों से दिल चीर देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ अपनी जान गंवाने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी के घर में मातम पसरा है। पिंकी के पिता अपनी बेटी की उन आखिरी यादों और आखिरी फोन कॉल को याद कर बार-बार फूट-फूट कर रो रहे हैं, जो पिंकी ने उड़ान भरने से कुछ ही मिनट पहले उन्हें की थी। उस वक्त किसे पता था कि एक होनहार बेटी का वह उत्साह भरा फोन कॉल उसके जीवन का आखिरी संवाद साबित होगा।
वह आखिरी फोन कॉल: “पप्पा, मैं बहुत खुश हूं”
पिंकी के पिता ने रुंधे गले से बताया कि विमान के उड़ान भरने से महज 20 मिनट पहले उनकी बेटी का फोन आया था।
- बेटी का उत्साह: पिंकी ने फोन पर कहा था, “पप्पा, आज मैं बहुत खुश हूं। मुझे वीआईपी ड्यूटी मिली है। मैं अजीत पवार दादा के साथ बारामती जा रही हूं। वहां से लौटकर मैं आपके लिए मिठाई लाऊंगी।”
- गर्व का पल बना गम: पिता ने कहा कि उनकी बेटी अपनी मेहनत के दम पर इस मुकाम तक पहुँची थी कि उसे राज्य के बड़े नेताओं के साथ उड़ने का अवसर मिला, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
हादसे की खबर मिलते ही थम गई सांसें
जैसे ही टीवी चैनलों पर बारामती में विमान क्रैश की खबरें फ्लैश होने लगीं, पिंकी के पिता का दिल किसी अनहोनी की आशंका से बैठने लगा।
- बार-बार किया फोन: पिता और परिवार के सदस्यों ने पिंकी के मोबाइल पर दर्जनों बार फोन किया, लेकिन हर बार फोन ‘आउट ऑफ रीच’ (पहुंच से बाहर) बताता रहा।
- अस्पताल से आया बुलावा: दोपहर बाद जब प्रशासन की ओर से फोन आया और उन्हें शव की पहचान के लिए बुलाया गया, तो परिवार की सारी उम्मीदें टूट गईं।
सपनों की उड़ान का दर्दनाक अंत
पिंकी एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थीं और बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना देखती थीं।
- मेहनती और जुझारू: पिंकी ने कड़े संघर्ष के बाद एविएशन सेक्टर में अपनी जगह बनाई थी। वह न केवल अपने परिवार का सहारा थीं, बल्कि अपनी छोटी बहन की पढ़ाई का खर्च भी वही उठा रही थीं।
- पड़ोसियों का दुख: पिंकी के पड़ोसियों ने बताया कि वह स्वभाव से बेहद सरल और मिलनसार थीं। जब भी वह यूनिफॉर्म पहनकर घर से निकलती थीं, तो पूरे मोहल्ले को उन पर गर्व होता था।
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब
पिंकी का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक निवास पर पहुँचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। प्रशासन की ओर से भी अधिकारियों ने पहुँचकर शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया।
- पिता की गुहार: बिलखते हुए पिता ने बस इतना ही कहा, “मेरी बेटी तो चली गई, लेकिन सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी और की बेटी ऐसे तकनीकी खराबी या लापरवाही की भेंट न चढ़े। इस हादसे की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
जांच के दायरे में सुरक्षा मानक
इस बीच, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) न केवल विमान की तकनीकी स्थिति की जांच कर रहा है, बल्कि चालक दल (क्रू) को दिए गए आराम और सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी समीक्षा कर रहा है।
“वो बस अपना फर्ज निभा रही थी। उसने कहा था कि शाम को घर आकर मेरे साथ खाना खाएगी, लेकिन अब उसका कभी कोई फोन नहीं आएगा।” — पिंकी के शोकाकुल पिता





