Friday, January 2, 2026

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‘पड़ोसी अच्छे नहीं, सुरक्षा के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं’: विदेश मंत्री जयशंकर की दो टूक

नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से अपनी स्पष्ट और आक्रामक कूटनीति का परिचय दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान भारत की सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने बिना नाम लिए पाकिस्तान और चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि “दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी अच्छे नहीं हैं।” उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि अपनी संप्रभुता और देश की रक्षा करने के लिए भारत अब दुनिया की किसी भी शक्ति से अनुमति नहीं लेगा।

“पड़ोसियों का चयन हमारे हाथ में नहीं”

विदेश मंत्री ने यथार्थवादी रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी देश अपना इतिहास बदल सकता है, लेकिन भूगोल नहीं। उन्होंने कहा कि भारत को विरासत में ऐसे पड़ोसी मिले हैं जो अक्सर अशांति और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब पड़ोसी देश आतंकवाद या सीमा विस्तार जैसे मुद्दों पर अड़े हों, तो भारत मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता।

सुरक्षा के लिए ‘सेल्फ-डिफेंस’ ही सर्वोपरि

जयशंकर ने भारत की रक्षा नीति में आए बदलावों को रेखांकित करते हुए निम्नलिखित प्रमुख बातें कहीं:

  • निर्णय लेने की स्वतंत्रता: उन्होंने कहा कि पहले भारत अपनी रक्षात्मक प्रतिक्रियाओं के लिए दूसरों की ओर देखता था, लेकिन अब नया भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए स्वयं निर्णय लेने में सक्षम है।
  • किसी से पूछने की जरूरत नहीं: विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जब भारत के राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा का प्रश्न आएगा, तो भारत क्या कदम उठाएगा, इसके लिए उसे किसी अन्य देश की सलाह या अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
  • मजबूत प्रतिक्रिया: उन्होंने संकेत दिया कि सीमा पर किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का जवाब अब उसी भाषा में और पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा।

वैश्विक समीकरणों पर प्रभाव

जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पर तनाव और वैश्विक स्तर पर गुटबाजी बढ़ रही है। उनके इस संबोधन को पश्चिमी देशों और पड़ोसी प्रतिद्वंद्वियों के लिए एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) के सिद्धांत पर अडिग है और अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है।

बदलते भारत की नई कूटनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह बयान भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ से ‘स्मार्ट पावर’ की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। जहाँ भारत शांति का पक्षधर है, वहीं अपनी सुरक्षा के मामले में अब वह किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है।

मुख्य अंश: विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की विदेश नीति अब रक्षात्मक होने के बजाय ‘प्रो-एक्टिव’ है, जो केवल राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देती है।

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