Saturday, March 7, 2026

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न्याय प्रणाली में उत्तराखंड का दबदबा: नए आपराधिक कानूनों को लागू करने में देश में नंबर-1; हरियाणा को पछाड़ा

देहरादून: देश की न्यायिक और कानून प्रवर्तन प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित किया है। भारत के नए आपराधिक कानूनों—भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)—को धरातल पर प्रभावी ढंग से उतारने में उत्तराखंड पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ राज्य बनकर उभरा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी ताजा रैंकिंग में उत्तराखंड ने तकनीकी और प्रशासनिक समन्वय के मामले में सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

रैंकिंग और स्कोर: कड़े मुकाबले में शीर्ष पर देवभूमि

NCRB के CCTNS/ICJS प्रोग्रेस डैशबोर्ड के अनुसार, देश के शीर्ष राज्यों के बीच स्कोर का अंतर बहुत कम रहा, लेकिन उत्तराखंड अपनी तकनीकी दक्षता के कारण पहले स्थान पर रहा:

रैंक राज्य स्कोर (100 में से)
1 उत्तराखंड 93.46
2 हरियाणा 93.41
3 असम 93.16
4 सिक्किम 91.82
5 मध्य प्रदेश 90.55

 

सफलता का आधार: ‘वन डेटा, वन एंट्री’ और डिजिटल नवाचार

उत्तराखंड की इस उपलब्धि के पीछे इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS 2.0) का बेहतर क्रियान्वयन है। राज्य ने पुलिसिंग को तकनीक से जोड़ने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:

  • एककीकृत प्रणाली: ‘वन डेटा, वन एंट्री’ तंत्र के माध्यम से पुलिस, जेल, कोर्ट, अभियोजन और फॉरेंसिक विभागों को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इससे डेटा का दोहराव खत्म हुआ है और फाइलों की आवाजाही रियल-टाइम और पेपरलेस हो गई है।
  • ई-साक्ष्य (e-Sakshya): पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपराध स्थलों की अनिवार्य वीडियोग्राफी और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए इस ऐप का शत-प्रतिशत उपयोग किया जा रहा है।
  • न्याय श्रुति: इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अदालतों में वर्चुअल सुनवाई की जा रही है, जिससे गवाहों और पुलिस अधिकारियों को बार-बार अदालत जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

मुख्यमंत्री का ‘मिशन मोड’ और पुलिस प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सफलता को ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ का परिणाम बताया है। मुख्यमंत्री ने स्वयं ‘टॉप-टू-बॉटम’ मॉनिटरिंग के जरिए तकनीकी बाधाओं को दूर किया। राज्य के 23,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को नए कानूनों की धाराओं और डिजिटल साक्ष्य संकलन की प्रक्रियाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी हाल ही में उत्तराखंड के इस तकनीकी समन्वय की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बताया था।

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