काठमांडू: नेपाल के राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सत्ताधारी गठबंधन की प्रमुख सहयोगी और देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी ‘नेपाली कांग्रेस’ में आधिकारिक रूप से फूट पड़ गई है। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे वैचारिक मतभेद और नेतृत्व के संघर्ष के बाद बागी गुट ने युवा और ओजस्वी नेता गगन थापा को अपना नया अध्यक्ष चुन लिया है। इस आंतरिक टूट ने नेपाल की वर्तमान सरकार को अल्पमत में ला दिया है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर संसद भंग कर दी है और आगामी 5 मार्च को देश में नए सिरे से आम चुनाव कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
गगन थापा का उदय और नेतृत्व परिवर्तन
नेपाली कांग्रेस के भीतर शेर बहादुर देउबा के पुराने नेतृत्व के खिलाफ युवा चेहरों ने मोर्चा खोल दिया था:
- युवाओं की पसंद: गगन थापा, जो अपनी प्रखर वक्ता शैली और आधुनिक विजन के लिए जाने जाते हैं, को पार्टी के असंतुष्ट धड़े ने अपना समर्थन दिया।
- पार्टी पर कब्जा: बागी गुट ने दावा किया है कि पार्टी की अधिकांश केंद्रीय कार्यसमिति और निर्वाचित सदस्य अब गगन थापा के साथ हैं, जिससे वे पार्टी के असली वारिस बन गए हैं।
- बदलाव का वादा: अध्यक्ष चुने जाने के बाद गगन थापा ने कहा कि नेपाल को अब ‘पुरानी पीढ़ी’ की जगह ‘नई ऊर्जा’ की जरूरत है, जो भ्रष्टाचार को खत्म कर विकास की नई राह पकड़े।
संसद भंग और चुनाव की घोषणा
पार्टी में हुई इस फूट का सीधा असर नेपाल की सरकार पर पड़ा है:
- सरकार का गिरना: नेपाली कांग्रेस में विभाजन के कारण वर्तमान गठबंधन सरकार ने अपना बहुमत खो दिया है। किसी भी अन्य दल द्वारा सरकार बनाने की स्थिति स्पष्ट न होने पर मध्यावधि चुनाव का रास्ता साफ हो गया।
- चुनाव की तारीख: नेपाल निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि देश भर में 5 मार्च को एक ही चरण में आम चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
- कार्यवाहक सरकार: तब तक वर्तमान प्रधानमंत्री कार्यवाहक क्षमता में देश की जिम्मेदारी संभालेंगे ताकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान संवैधानिक संकट पैदा न हो।
नेपाल में सियासी अस्थिरता का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फूट से नेपाल में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो सकता है:
- विपक्षी दलों की सक्रियता: सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) और माओवादी केंद्र (Maoist Center) जैसे विपक्षी दल इस टूट का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
- भारत और चीन की नजर: नेपाल में हो रहे इस बड़े उलटफेर पर पड़ोसी देश भारत और चीन भी पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि नेपाल की सत्ता का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा और द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ता है।
निष्कर्ष: अग्निपरीक्षा के दौर में नेपाल
नेपाली कांग्रेस में पड़ी यह फूट पार्टी के भविष्य के लिए एक ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है। क्या गगन थापा पार्टी को एकजुट कर चुनाव जीत पाएंगे या पुरानी पीढ़ी की बगावत उन्हें कमजोर करेगी, यह तो 5 मार्च के नतीजे ही बताएंगे। फिलहाल, नेपाल की जनता एक बार फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपना नया प्रतिनिधि चुनने की तैयारी में है।





