पटना।
बिहार में नई सरकार के गठन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। एनडीए गठबंधन की ओर से नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। यह उनका ऐतिहासिक दसवां कार्यकाल होगा, जिसकी वजह से इस समारोह को राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण कार्यक्रम में एनडीए के तमाम शीर्ष नेता, सांसद, विधायक व सहयोगी दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल के गठन में वही पुराना और आजमाया हुआ “साझा फॉर्मूला” लागू किया जाएगा, जिसके तहत सभी सहयोगी दलों को सीटों के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। जदयू और भाजपा के अलावा इस बार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) और राष्ट्रीय लोकमत पार्टी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलने जा रही है। इन दलों के विधायकों की संख्या और राजनीतिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें महत्वपूर्ण विभाग सौंपे जाने की चर्चा है।
जदयू के कोटे से करीब एक दर्जन मंत्री बनाए जाने की संभावना है, जबकि भाजपा से 15 से अधिक नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। एलजेपी (रामविलास) को दो मंत्रालय मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं जीतनराम मांझी की पार्टी HAM और उपेंद्र कुशवाहा के नेतृत्व वाली RLM के हिस्से एक-एक पद जाने की उम्मीद है।
नीतीश कुमार के करीबी सूत्रों ने बताया कि नए मंत्रिमंडल में युवाओं और अनुभवी चेहरों का संतुलन रखा जाएगा। प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं को वित्त, गृह, ग्रामीण विकास, शिक्षा जैसे अहम मंत्रालय दिए जा सकते हैं, जबकि नई ऊर्जा लाने के लिए कुछ युवा विधायकों को भी मौका मिलेगा। विभागों के बंटवारे में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को भी विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि राज्य के सभी हिस्सों में राजनीतिक संदेश स्पष्ट जाए।
शपथ ग्रहण से पहले एनडीए विधायक दल की बैठक में नीतीश कुमार को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। बैठक में भाजपा और जदयू के नेताओं ने कहा कि आगामी वर्षों में विकास, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गठबंधन की कोशिश है कि स्थिर सरकार देकर जनता का भरोसा मजबूत किया जाए।
नीतीश कुमार के दसवें शपथ ग्रहण के साथ बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया मंत्रिमंडल किन चेहरों के साथ और किन प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ेगा।





