नई दिल्ली। नीट-यूजी 2026 और यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित पेपर लीक व अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सरकार के साथ वार्ता का तीसरा दौर प्रस्तावित था।
पिछले एक महीने से छात्र संगठन और सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में हजारों छात्र परीक्षा प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की जवाबदेही और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन ने धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर का स्वरूप ले लिया, जिससे केंद्र सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता गया।
इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलनकारियों ने खुशी जताई। प्रदर्शन स्थल पर लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई और इसे युवाओं की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताया। हालांकि आंदोलन से जुड़े नेताओं ने कहा कि उनका संघर्ष अभी समाप्त नहीं हुआ है और वे परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच तथा प्रभावित छात्रों के लिए न्याय की मांग जारी रखेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला किया है ताकि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह का विवाद आगे न बढ़े। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता बनी रहेगी।
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों का विरोध तेज हो गया था। बाद में यूजीसी-नेट परीक्षा को लेकर भी सवाल उठे, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस और गहरी हो गई। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और जवाबदेही तय करने की मांग की।





